धान खरीदी से लेकर प्रशासन तक सियासी संग्राम…पूर्व मंत्री डहरिया ने लगाए गंभीर आरोप, सरकार पर साधा निशाना

रायपुर :  धान खरीदी केंद्रों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मंत्री शिव कुमार डहरिया ने राज्य सरकार और व्यवस्था पर तीखे आरोप लगाते हुए इसे बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जोड़ दिया है। उनके बयानों के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।

धान खरीदी केंद्रों में अनियमितता का आरोप

शिव कुमार डहरिया ने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई धान खरीदी केंद्रों में स्टॉक की कमी और गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि करोड़ों रुपये का धान कथित तौर पर ‘चूहे खा रहे हैं’, जिससे व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़े होते हैं।उन्होंने यह भी दावा किया कि जहां कांग्रेस से जुड़े प्रतिनिधि हैं, वहीं कार्रवाई की जा रही है, जबकि अन्य पक्षों से जुड़े लोगों को लेकर नरमी बरती जा रही है।

प्रशासन और सरकार पर तीखा हमला

पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन जैसी कोई व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही है। उनके अनुसार, प्रशासनिक तंत्र में असंतोष और अराजकता जैसी स्थिति बन रही है।उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी स्तर पर निर्णयों का पालन नहीं हो रहा और आम जनता के कामों में देरी की जा रही है।

अफसरशाही पर भी उठाए सवाल

डहरिया ने कहा कि आईएएस और आईपीएस अधिकारियों पर नियंत्रण की कमी है और कई मामलों में अधिकारी न तो सत्ता पक्ष की सुन रहे हैं और न ही आम जनता की समस्याओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने इसे प्रशासनिक विफलता बताया।

खाद और किसानों की समस्या पर सरकार को घेरा

कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम के बयान पर पलटवार करते हुए डहरिया ने कहा कि जमीनी हकीकत यह है कि किसान खाद और बीज के लिए परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सोसायटियों में पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं है और किसान लगातार परेशान होकर भटक रहे हैं।

ED कार्रवाई पर भी उठाए सवाल

शराब घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई पर भी उन्होंने सवाल उठाए। डहरिया ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है और विपक्षी दलों को निशाना बनाया जा रहा है।

राजनीति में बढ़ी तल्खी

धान खरीदी, प्रशासनिक व्यवस्था और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर दिए गए इन बयानों से छत्तीसगढ़ की राजनीति में टकराव और तेज हो गया है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।

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