रायपुर। झीरम घाटी नक्सली हमले में NIA की विशेष अदालत के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति फिर गर्म हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने फैसले पर असंतोष जताते हुए जांच की दिशा और दायरे को लेकर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इस मामले में पीड़ित परिवारों, बस्तर की जनता और कांग्रेस को अब तक पूरा न्याय नहीं मिल पाया है।बैज ने झीरम घाटी की घटना को केवल नक्सली हमला मानने से इनकार करते हुए इसे राजनीतिक षड्यंत्र और सुनियोजित हत्याकांड करार दिया। उन्होंने कहा कि घटना के पीछे की पूरी साजिश सामने लाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृह मंत्री समेत उस समय के कई वरिष्ठ अधिकारियों और प्रमुख सरेंडर नक्सलियों की जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में हुई पत्रकारवार्ता
पत्रकारवार्ता में पूर्व मंत्री शिव डहरिया, पूर्व विधायक विकास उपाध्याय सहित कांग्रेस के कई नेता मौजूद थे। दीपक बैज ने कहा कि 25 मई 2013 छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक दुखद और काला दिन था।उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमियां थीं और किसी प्रभावी बैकअप योजना का अभाव था। बैज के अनुसार, इतने वर्षों बाद भी जनता झीरम घाटी हमले की पूरी सच्चाई जानना चाहती है, लेकिन राजनीतिक षड्यंत्र के पहलू की गंभीरता से जांच नहीं की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता परिवर्तन के बाद जांच की दिशा में बदलाव किया गया।
सिर्फ 10 दोषियों तक सीमित क्यों रही कार्रवाई?
दीपक बैज ने NIA की जांच और अदालत के फैसले के बाद उठे सवालों का जिक्र करते हुए कहा कि FIR में बड़ी संख्या में नक्सलियों के नाम दर्ज थे, लेकिन आखिरकार केवल 10 आरोपियों को दोषी ठहराया गया। उन्होंने सवाल किया कि इतने बड़े और सुनियोजित हमले को क्या सिर्फ निचले स्तर के 10 नक्सलियों ने अंजाम दिया था।बैज ने कहा कि गणपति, रमन्ना समेत कई बड़े नक्सली नेताओं के नाम शुरुआती दस्तावेजों में थे। उन्होंने पूछा कि जांच के दौरान इन नामों की भूमिका को लेकर क्या कार्रवाई की गई और बड़े नक्सली नेताओं से पूछताछ क्यों नहीं हुई।उन्होंने बसवराजू, गणेश, सोनू उर्फ भूपति और केंद्रीय समिति से जुड़े अन्य नक्सली नेताओं की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग उठाई। बैज ने सवाल किया कि यदि हमले में बड़ी संख्या में नक्सली शामिल थे तो दोषसिद्धि केवल 10 लोगों तक ही क्यों सीमित रह गई।
NIA की जांच पर कांग्रेस ने जताया अविश्वास
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि NIA ने केंद्र सरकार के प्रभाव में जांच की और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की हत्या के पीछे मौजूद कथित साजिश को सामने नहीं आने दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस इस जांच और फैसले से संतुष्ट नहीं है।बैज के मुताबिक, पीड़ित परिवारों और कांग्रेस को अभी भी पूर्ण न्याय का इंतजार है। उन्होंने मामले की सच्चाई तक पहुंचने के लिए व्यापक जांच की आवश्यकता बताई।
नार्को टेस्ट की मांग, तत्कालीन सरकार पर निशाना
दीपक बैज ने कहा कि मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने लाने के लिए नार्को टेस्ट कराया जाना चाहिए। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के साथ उस समय के मुख्य सचिव, डीजीपी, एडीजी नक्सल और प्रमुख सरेंडर नक्सलियों के नार्को टेस्ट की मांग की।बैज का कहना था कि इस तरह की जांच से घटना से जुड़े अनुत्तरित सवालों के जवाब मिल सकते हैं और झीरम घाटी हमले की वास्तविक सच्चाई सामने आ सकती है।
छोटे लोगों को सजा, बड़े नामों पर सवाल
बैज ने दावा किया कि बारसे देवा, चैतु उर्फ श्याम दादा, सुरेंद्र और सुजाता जैसे नाम सरेंडर के बाद सरकार के संपर्क में रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या NIA ने इन लोगों से घटना के संबंध में विस्तृत पूछताछ की।उन्होंने आरोप लगाया कि जांच की दिशा ऐसी रही, जिसमें छोटे स्तर के लोगों पर कार्रवाई हुई, जबकि बड़े नामों की भूमिका पर पर्याप्त जवाब सामने नहीं आए। कांग्रेस का आरोप है कि जांच को व्यापक दायरे में आगे बढ़ाने की जरूरत है।
राज्य की SIT से जांच आगे बढ़ाने की मांग
झीरम मामले को लेकर सांसद संतोष पाण्डेय के उस बयान पर भी दीपक बैज ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें भूपेश बघेल के पास सबूत होने की बात कही गई थी। बैज ने कहा कि भूपेश बघेल अपने बयान से पीछे नहीं हटे हैं और यदि उनके पास कोई जानकारी या सबूत है तो उनसे औपचारिक पूछताछ की जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि सच्चाई तक पहुंचने के लिए राज्य की SIT को अपनी जांच आगे बढ़ानी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि झीरम घाटी कांड के सभी पहलुओं की निष्पक्ष और व्यापक जांच के बाद ही पीड़ित परिवारों को वास्तविक न्याय मिल सकेगा।



















