CG Legal Metrology: व्यापारियों के लिए आसान हुई पंजीयन व्यवस्था, अब लाइसेंस की जगह ऑनलाइन प्रमाण-पत्र से होगा काम

 छत्तीसगढ़ : सरकार ने विधिक माप विज्ञान व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए निर्माता, सुधारक और विक्रेताओं के लिए पंजीयन प्रक्रिया को सरल और डिजिटल कर दिया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने छत्तीसगढ़ विधिक माप विज्ञान प्रवर्तन नियम, 2011 में संशोधन किया है। नई व्यवस्था से कारोबारियों को लाइसेंस प्रक्रिया की जटिलता से राहत मिलेगी और कई काम ऑनलाइन किए जा सकेंगे।

लाइसेंस व्यवस्था खत्म, अब पंजीयन प्रमाण-पत्र

संशोधित नियमों के तहत निर्माता, सुधारक और विक्रेताओं के लिए पहले लागू लाइसेंस आधारित व्यवस्था को समाप्त कर पंजीयन प्रमाण-पत्र की व्यवस्था लागू की गई है। इसके लिए संबंधित कारोबारी विभागीय पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।पंजीयन स्व-घोषणा के आधार पर किया जाएगा। प्रमाण-पत्र जारी करने से पहले होने वाला अनिवार्य भौतिक निरीक्षण भी अब जरूरी नहीं रहेगा।

पंजीयन प्रमाण-पत्र रहेगा स्थायी

नई व्यवस्था के तहत पंजीयन प्रमाण-पत्र सामान्य परिस्थितियों में स्थायी रूप से वैध रहेगा। इसके लिए बार-बार नवीनीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी।पंजीयन प्रमाण-पत्र में किसी जानकारी को बदलने या नई प्रविष्टि कराने की जरूरत होने पर भी ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। विभाग पंजीकृत निर्माता, सुधारक और विक्रेताओं का डिजिटल डेटाबेस भी तैयार करेगा।

दूसरे राज्य में इस्तेमाल होने वाले बाट-माप की मरम्मत में भी राहत

सरकार ने व्यवसाय को आसान बनाने के लिए दूसरे राज्यों में इस्तेमाल होने वाले बाट और माप से जुड़ा प्रावधान भी सरल किया है। यदि किसी निर्माता द्वारा तैयार किए गए बाट या माप की दूसरे राज्य में मरम्मत की जरूरत पड़ती है, तो निर्माता को अलग से सुधारक पंजीयन प्रमाण-पत्र लेने की आवश्यकता नहीं होगी।ऐसे मामले में संबंधित विधिक माप विज्ञान अधिकारी को मरम्मत की पूर्व सूचना देना पर्याप्त होगा।

गलत जानकारी पर रद्द हो सकता है पंजीयन

डिजिटल और स्व-घोषणा आधारित व्यवस्था का मतलब नियमों में छूट नहीं है। यदि पंजीयन के दौरान दी गई जानकारी गलत या भ्रामक पाई जाती है अथवा विधिक माप विज्ञान अधिनियम और नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो जांच के बाद पंजीयन प्रमाण-पत्र रद्द किया जा सकता है।हालांकि, कार्रवाई से पहले संबंधित पंजीयनधारी को अपना पक्ष रखने का अवसर देना अनिवार्य होगा।

नोटिस और सुधार की प्रक्रिया भी ऑनलाइन

किसी नियम के उल्लंघन पर सुधार सूचना और शमन सूचना इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जारी की जा सकेगी। निर्धारित समय में कमी दूर नहीं करने पर नियमों के अनुसार अभियोजन, अपराध के शमन तथा पंजीयन के निलंबन या निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है।

पंजीयन के लिए कितना शुल्क देना होगा

संशोधित नियमों में अलग-अलग श्रेणियों के लिए शुल्क भी तय किया गया है।

  • निर्माता का पंजीयन शुल्क: 50 हजार रुपए
  • सुधारक का पंजीयन शुल्क: राज्य, संभाग और जिला स्तर पर 20 हजार रुपए
  • पंजीयन प्रमाण-पत्र में संशोधन या अतिरिक्त प्रविष्टि: 1 हजार रुपए

उपभोक्ताओं की सुरक्षा के नियम रहेंगे लागू

सरकार ने कारोबारियों के लिए प्रक्रिया भले ही आसान की है, लेकिन उपभोक्ताओं के हितों से जुड़े मानकों में ढील नहीं दी गई है। पंजीयनधारियों के लिए सत्यापित और मुद्रांकित बाट-माप का इस्तेमाल अनिवार्य रहेगा।असत्यापित, अमुद्रांकित या अमानक बाट-माप को बिक्री के लिए रखना प्रतिबंधित रहेगा। यानी लाइसेंस व्यवस्था समाप्त होने के बाद भी मानकों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों पर विभागीय कार्रवाई जारी रहेगी।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *