हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सौतेली बहन को नहीं मिलेगी भाई-बहन की कस्टडी, मिलने पर भी लगी स्थायी रोक

 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दो मासूम भाई-बहनों की सुरक्षा, संरक्षण और पुनर्वास से जुड़े एक संवेदनशील मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि बच्चों को किसी भी परिस्थिति में उनकी सौतेली बहन या उसके पति की कस्टडी नहीं सौंपी जाएगी। अदालत ने दोनों को बच्चों से मिलने पर भी स्थायी रोक लगा दी है।हालांकि अदालत ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि बच्चे किसी अवैध हिरासत में नहीं, बल्कि बाल कल्याण समिति की देखरेख में सुरक्षित हैं। इसके बावजूद कोर्ट ने बच्चों के भविष्य, शिक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास की निगरानी जारी रखने का निर्णय लिया है।

गोपनीय रिपोर्ट में सामने आई प्रताड़ना की गंभीर तस्वीर

अदालत के निर्देश पर बच्चों से बंद कमरे में बातचीत कर तैयार की गई गोपनीय रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए। बच्चों ने बताया कि उन्हें स्कूल जाने से पहले घर के अधिकांश काम करने के लिए मजबूर किया जाता था। छोटे भाई के साथ अक्सर मारपीट होती थी, जबकि बड़ी बहन ने आरोप लगाया कि उसके जीजा ने उसके साथ शारीरिक हिंसा की और यौन शोषण का प्रयास भी किया। इस मामले में पहले से आपराधिक प्रकरण दर्ज है।बच्चों ने अदालत के समक्ष साफ शब्दों में कहा कि वे किसी भी स्थिति में सौतेली बहन के घर वापस नहीं जाना चाहते, क्योंकि वहां का माहौल उन्हें भयभीत करता है।

भाई-बहन को साथ रखने के लिए कोर्ट के विशेष निर्देश

वर्तमान में दोनों बच्चे अलग-अलग बाल गृहों में रह रहे हैं। अदालत ने जिला प्रशासन और बाल कल्याण समिति को निर्देश दिया है कि जहां तक संभव हो, दोनों को एक ही शहर के अलग-अलग बाल गृहों में रखा जाए, ताकि वे नियमित रूप से एक-दूसरे से मिल सकें।इसके साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि सप्ताह में कम से कम एक बार दोनों भाई-बहन की मुलाकात किसी पार्क, मनोरंजन केंद्र या अन्य सुरक्षित बाल-अनुकूल स्थान पर कराई जाए। इस दौरान अधिकारी केवल सुरक्षा के लिए मौजूद रहेंगे और बच्चों को स्वतंत्र रूप से समय बिताने का अवसर मिलेगा।

गोद लेने की संभावनाओं पर भी होगा विचार

सुनवाई के दौरान बच्चों ने इच्छा जताई कि भविष्य में उन्हें किसी अच्छे परिवार द्वारा गोद लिया जाए। इसे ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत फॉस्टर केयर, गोद लेने और दीर्घकालिक पुनर्वास की संभावनाओं पर गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए हैं।

बाल गृह की व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त

बच्ची ने अदालत को बताया कि बाल गृह में रहने की व्यवस्था संतोषजनक नहीं है और एक बंक बेड पर तीन-तीन बच्चों को सोना पड़ता है। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रताड़ना झेल चुके बच्चों को केवल आश्रय देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण भी मिलना चाहिए।

कोर्ट ने सरगुजा कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से बाल गृहों का निरीक्षण करने और बिस्तर, स्वच्छता सहित सभी आवश्यक सुविधाओं में तत्काल सुधार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

15 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने सरगुजा कलेक्टर से व्यक्तिगत हलफनामा और बाल कल्याण समिति से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य तथा काउंसलिंग से जुड़ी प्रगति रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।

क्या है पूरा मामला?

सौतेली बहन ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर दावा किया था कि उसके भाई-बहन को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है। सुनवाई के दौरान बच्चों ने अदालत के सामने गंभीर प्रताड़ना और यौन शोषण के प्रयास का आरोप लगाया। इसके बाद अदालत ने बच्चों की काउंसलिंग कराई और गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट कर दिया कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने सौतेली बहन और उसके पति को कस्टडी देने से इनकार करते हुए उनसे मिलने पर भी स्थायी रोक लगा दी।

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