रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 172 करोड़ रुपये के शराब ओवरटाइम भुगतान घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) के तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया है। अदालत में पेशी के बाद उन्हें 20 जुलाई तक दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। जांच एजेंसियों को पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्यों और साक्ष्यों के सामने आने की उम्मीद है।
भ्रष्टाचार और फर्जी दस्तावेजों से जुड़े गंभीर आरोप
ईओडब्ल्यू-एसीबी में दर्ज प्रकरण के अनुसार मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धाराओं 7(बी) और 8 के अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 467, 468, 471 और 120-बी के तहत अपराध दर्ज किया गया है। आरोप है कि ओवरटाइम भुगतान सहित अन्य मदों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की गईं।
ओवरटाइम, बोनस और सर्विस चार्ज के नाम पर 172 करोड़ से अधिक का भुगतान
जांच में सामने आया है कि वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच कर्मचारियों के ओवरटाइम, चार अतिरिक्त कार्यदिवस, बोनस और सर्विस चार्ज के नाम पर मैनपावर एजेंसियों को 172 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस राशि का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर नकद कमीशन के रूप में एक संगठित सिंडिकेट के माध्यम से हासिल किया गया।
ईडी की कार्रवाई के बाद शुरू हुई जांच
इस मामले की शुरुआत तब हुई जब 29 नवंबर 2023 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने तीन व्यक्तियों के पास से 28.80 लाख रुपये नकद जब्त किए। ईडी ने इसकी जानकारी राज्य सरकार को भेजी, जिसके आधार पर ईओडब्ल्यू-एसीबी ने एफआईआर दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की।
पहले ही दाखिल हो चुका है आरोप पत्र
जांच एजेंसी इस मामले में पहले ही 12 आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत कर चुकी है। अब पूर्व एमडी अरुणपति त्रिपाठी की गिरफ्तारी को जांच की अहम कड़ी माना जा रहा है।
पूछताछ में बढ़ सकती है जांच की दिशा
जांच एजेंसियों का मानना है कि पुलिस रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ से भुगतान प्रक्रिया, कथित कमीशन नेटवर्क और अन्य संभावित आरोपियों से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य मिल सकते हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है।



















