अंबिकापुर : शिक्षा अधिकारी कार्यालय एक बार फिर विवादों में है। आरोप है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों को शासन के आदेश के बाद पहले ही कार्यमुक्त किया जा चुका है, उनसे अब भी नियमित रूप से सरकारी काम कराया जा रहा है। इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव परवेज आलम गांधी ने जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
कार्यभार खत्म होने के बाद भी कार्यालय में निभा रहे जिम्मेदारी
ज्ञापन में कहा गया है कि लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी आदेशों के अनुसार कई अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना वाले संस्थानों में वापस भेज दिया गया था। इसके बावजूद आरोप है कि भरत लाल अग्रवाल, संतोष साहू समेत कई शिक्षक, लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अब भी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में नियमित रूप से उपस्थित होकर शासकीय कार्य कर रहे हैं।इसके अलावा साक्षर भारत परियोजना और छात्रावास अधीक्षक के रूप में संलग्न कुछ कर्मचारियों को भी अब तक कार्यमुक्त नहीं किया गया है, जबकि संबंधित आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
शासन के आदेशों की अनदेखी का आरोप
परवेज आलम गांधी ने इस पूरे मामले को शासन के निर्देशों की अवहेलना और प्रशासनिक अनियमितता करार दिया है। उनका कहना है कि यदि कार्यमुक्ति के आदेश लागू हो चुके हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यालय में मौजूदगी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने मांग की है कि सभी संबंधित कर्मचारियों को तत्काल उनके मूल पदस्थापना वाले संस्थानों में भेजकर वहां कार्यभार ग्रहण कराया जाए और इसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से जारी की जाए।
तीन दिन का अल्टीमेटम, नहीं हुई कार्रवाई तो होगा प्रदर्शन
कांग्रेस नेता ने जिला शिक्षा अधिकारी को तीन दिन का समय देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर कार्रवाई नहीं होती है तो जनहित और प्रशासनिक पारदर्शिता की मांग को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सामने शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।उन्होंने यह भी कहा कि यदि विरोध प्रदर्शन की स्थिति बनती है तो उससे उत्पन्न होने वाली प्रशासनिक और विधिक परिस्थितियों की जिम्मेदारी संबंधित विभाग और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की होगी।



















