छत्तीसगढ़ : राजनीति में एक बार फिर बहस का मुद्दा गरमा गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर हुई सियासी तकरार के बाद अब डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को नक्सलवाद के मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती दी है। विजय शर्मा ने कहा कि वह इस विषय पर तथ्यों और दस्तावेजों के साथ चर्चा के लिए तैयार हैं।
नक्सलवाद के मुद्दे पर विजय शर्मा ने साधा कांग्रेस पर निशाना
विजय शर्मा ने नक्सलवाद को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मुद्दे पर केवल बयानबाजी करने के बजाय ठोस तथ्यों के साथ बात होनी चाहिए। उन्होंने भूपेश बघेल से कहा कि यदि उनके पास नक्सलवाद से जुड़े कोई महत्वपूर्ण सबूत हैं तो उन्हें संबंधित जांच एजेंसी के सामने रखना चाहिए।डिप्टी सीएम ने यह भी कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद यदि किसी के पास कोई ठोस प्रमाण था तो उसे सामने लाया जाना चाहिए था। उन्होंने संकेत दिया कि अब भी दस्तावेज और सबूत सार्वजनिक किए जा सकते हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना पर भी फिर बहस का न्योता
विजय शर्मा ने प्रधानमंत्री आवास योजना के मुद्दे को लेकर भी अपनी चुनौती दोहराई। उन्होंने कहा कि यदि भूपेश बघेल इस विषय पर चर्चा करना चाहते हैं तो वह इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री चाहें तो तैयारी के लिए एक महीने का समय ले सकते हैं और इसके बाद दोनों पक्ष आमने सामने बैठकर चर्चा कर सकते हैं।इस बयान के बाद पीएम आवास योजना को लेकर पहले शुरू हुई राजनीतिक बहस को फिर से हवा मिल गई है। अब नजर इस बात पर है कि इस चुनौती पर भूपेश बघेल की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
तारा कोल ब्लॉक पर भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री साय को दी थी चुनौती
इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर राज्य सरकार पर सवाल खड़े किए थे। भिलाई टाउनशिप में गणेश पंडालों के दौरे के दौरान बघेल ने आरोप लगाया कि कोल ब्लॉक की नीलामी के मामले में जनता के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं की जा रही है।बघेल ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हसदेव अरण्य क्षेत्र के कुछ कोल ब्लॉकों को नीलामी से बाहर रखने की दिशा में प्रक्रिया शुरू की गई थी। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के 11 दिसंबर 2025 के पत्र का हवाला देते हुए तारा कोल ब्लॉक को लेकर सवाल उठाए।
दस्तावेजों के साथ आमने सामने चर्चा की मांग
भूपेश बघेल ने कहा था कि इस पूरे मामले से जुड़े दस्तावेज उनके पास भी हैं और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पास भी संबंधित पत्र मौजूद हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि दोनों पक्ष अपने दस्तावेज मीडिया के सामने रखें और पूरे मामले पर आमने सामने चर्चा करें।बघेल का कहना था कि आरोप प्रत्यारोप के बजाय दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर जनता के सामने स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। अब नक्सलवाद और कोल ब्लॉक जैसे मुद्दों को लेकर दोनों नेताओं के बीच बहस की चुनौती ने छत्तीसगढ़ की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है।



















