चंबल में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एमपी सरकार को लगाई कड़ी फटकार

मध्य प्रदेश : के चंबल क्षेत्र में बढ़ते अवैध खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि राज्य सरकार अपनी विफलता को छिपाने के लिए बहाने नहीं बना सकती। जरूरत पड़ी तो हालात काबू में लाने के लिए पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करने तक की चेतावनी दी गई है।

हाईटेक निगरानी के निर्देश, अवैध रास्तों पर लगेंगे कैमरे
सुप्रीम कोर्ट ने अवैध खनन को रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि ऐसे मार्गों पर हाई रेजोल्यूशन और वाईफाई सक्षम सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, जहां से खनन गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इससे निगरानी मजबूत होगी और गैरकानूनी गतिविधियों पर लगाम लग सकेगी।

सरकार के तर्क पर नाराजगी, माफिया के सामने कमजोर व्यवस्था उजागर
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में यह दलील दी थी कि वन अधिकारी रेत माफिया के मुकाबले के लिए पर्याप्त संसाधनों से लैस नहीं हैं, जबकि माफिया आधुनिक हथियारों और वाहनों से सुसज्जित हैं। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए इसे प्रशासनिक कमजोरी का संकेत बताया।

गंभीरता की कमी पर सवाल, अवैध गतिविधियों को मिल रहा बढ़ावा
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने टिप्पणी की कि इस तरह के तर्क यह दर्शाते हैं कि राज्य अवैध खनन को रोकने के प्रति गंभीर नहीं है। इससे न केवल कानून व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि हिंसा, जनहानि और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है।

चंबल अभयारण्य पर खतरा, दुर्लभ जीवों का अस्तित्व दांव पर
करीब 5400 वर्ग किलोमीटर में फैला राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य कई दुर्लभ प्रजातियों का घर है। यहां घड़ियाल, लाल मुकुट कछुआ और गंगा डॉल्फिन जैसे जीव पाए जाते हैं। अवैध खनन से इनके प्राकृतिक आवास पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

अगली सुनवाई 11 मई को, सरकार के कदमों पर टिकी नजरें
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 11 मई तय की है। अब यह देखना अहम होगा कि अदालत की सख्ती के बाद मध्य प्रदेश सरकार अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *