छत्तीसगढ़ : मानसून एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है। बीते 24 घंटे में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जबकि उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में तेज बारिश ने जनजीवन पर असर डाला। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले तीन से चार दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। उत्तर छत्तीसगढ़ में कुछ स्थानों पर भारी बारिश की स्थिति बन सकती है।
प्रदेश में बारिश की स्थिति फिलहाल सामान्य दायरे में है, लेकिन सीजन के कुल आंकड़ों में करीब 9 प्रतिशत की कमी बनी हुई है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां और बढ़ सकती हैं।
बंगाल की खाड़ी की हलचल से फिर बदला मौसम का ट्रेंड
उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे लगे पश्चिम बंगाल तथा उत्तरी ओडिशा के तटीय क्षेत्र में निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके साथ चक्रवाती परिसंचरण भी सक्रिय है, जो समुद्र तल से करीब 7.6 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला है।
मौसम प्रणाली के उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने के संकेत हैं। इसके अगले 24 घंटे में और प्रभावी होने की संभावना जताई गई है। इसी सिस्टम का असर छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में बारिश के रूप में दिखाई दे सकता है।
बांगो बांध में तेजी से बढ़ा पानी, 10 गेट खोलने की नौबत क्यों आई
कोरबा जिले में लगातार बारिश के चलते मिनीमाता बांगो बांध का जलस्तर तेजी से ऊपर गया है। बांध में पानी का स्तर करीब 92.48 प्रतिशत तक पहुंचने के बाद प्रशासन ने 10 गेट खोल दिए हैं।
इन गेटों से लगभग 70 हजार क्यूसेक पानी हसदेव नदी में छोड़ा जा रहा है। पानी की बढ़ती आवक को देखते हुए नदी किनारे के इलाकों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को नदी के पास नहीं जाने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।
15 अगस्त को भी बांगो बांध के पांच गेट खोले गए थे। उस समय करीब 3005 क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया था। इसके बाद जलस्तर और आवक बढ़ने के साथ गेटों की संख्या बढ़ाकर 10 कर दी गई।
35 गांवों में बढ़ी निगरानी, लोगों को नदी किनारे जाने से रोका गया
बांगो बांध से पानी छोड़े जाने के बाद कोरबा जिले के 35 गांवों के लिए बाढ़ की आशंका को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। प्रभावित गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सावधान किया गया है।
बांगो, चर्रा, पोड़ी-उपरोड़ा, कोनकोना, लेपरा, टुनियाकछार, पाथा, गाड़ाघाट, छिनमेर, कछार, कलमीपारा, सिलीयारीपारा, जूनापारा, तिलाईडाड, डुगुपारा, टुंगुमांड़ा, छिर्रापारा, मछलीबाटा, कोरियाघाट, धनगांव, डोंगाघाट, नरमदा, औराकछार, सोनगुड़ा, जेलगांव, झाबू, नवागांव, तिलसाभाटा, लोतलोता, स्याहीमुड़ी, कोडा, हथमार, झोरा और सिरकीकला में प्रशासन विशेष निगरानी कर रहा है।
लोगों को नदी, नालों और निचले इलाकों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।
बांध के खुले गेट के पास पहुंचना पड़ा भारी, युवक तेज बहाव में लापता
बांगो बांध में एक युवक के खुले गेट की दिशा में छलांग लगाने की घटना भी सामने आई है। तेज बहाव में बहने के बाद युवक का पता नहीं चल पाया है। घटना से जुड़ा वीडियो भी सामने आया है।
युवक की तलाश में पुलिस और प्रशासन की टीम जुटी हुई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बांध के खुले गेट, नदी के तेज बहाव और जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने का जोखिम न लें।
मुडमार बांध में हादसे ने बढ़ाई चिंता, नहाने गए युवक की मौत
महासमुंद जिले के मुडमार बांध में भी हादसा हुआ। 15 अगस्त को दोस्तों के साथ घूमने पहुंचे 35 वर्षीय प्रणय गुर्वेकर की नहाते समय पानी में डूबने से मौत हो गई।
बताया गया कि प्रणय पांच दोस्तों के साथ बांध पहुंचा था। नहाने के दौरान वह गहरे पानी में चला गया और डूब गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और गोताखोरों की मदद से शव को बाहर निकाला गया।
इन इलाकों में आसमान से खूब बरसा पानी
बीते 24 घंटे के दौरान कोटाडोल में सबसे ज्यादा 130 MM बारिश दर्ज की गई। शंकरगढ़ और पोड़ी-उपरोड़ा में 110-110 MM पानी गिरा।
सन्ना, दौरा कोचली और रघुनाथनगर में 80-80 MM तथा जनकपुर-भरतपुर में 70 MM बारिश हुई। बलरामपुर, वाड्रफनगर, चलगली और सामरी में 60-60 MM बारिश दर्ज की गई।
रतनपुर, कुनकुनी, बेलतरा, पचपेड़ी, भैसमा, कोरबा, बेलगहना, मनोरा, सकरी और मस्तूरी में 50-50 MM बारिश हुई। पाली, बगीचा, रामचंद्रपुर, दुलदुला, सीपत, करतला और जगदलपुर में 40-40 MM बारिश दर्ज की गई।
पेंड्रा, रामानुजगंज, मनेंद्रगढ़, कांसाबेल, कुसमी, कोंटा, बस्तर, जशपुरनगर, नवागढ़, मरवाही, पामगढ़, केल्हारी, पेंड्रारोड, चांदो, बिलासपुर, अकलतरा, टोकापाल, सकरी, सकौला, बैकुंठपुर और खड़गवां में करीब 30 MM तक बारिश दर्ज हुई।
अगले कई दिन मौसम रहेगा सक्रिय, कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर बना रह सकता है। उत्तर छत्तीसगढ़ के कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। बारिश के दौरान गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा।
17 अगस्त को भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश तथा कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। 18 अगस्त को एक-दो स्थानों पर भारी बारिश के साथ बिजली गिरने की संभावना है। 19 और 20 अगस्त को भी कई इलाकों में बारिश जारी रह सकती है तथा कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की स्थिति बन सकती है।
एक और मौसम प्रणाली बनने के संकेत, बारिश का दौर लंबा खिंचने की वजह यही हो सकती है
दक्षिण-पूर्वी झारखंड और आसपास के क्षेत्र में बना निम्न दबाव क्षेत्र भी मौसम को प्रभावित कर रहा है। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण करीब 4.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक सक्रिय है। इसके अगले 12 घंटे में कमजोर होने की संभावना है।
दूसरी ओर उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में समुद्र तल से करीब 5.8 से 7.6 किलोमीटर की ऊंचाई के बीच चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके प्रभाव से अगले 48 घंटे के दौरान उत्तर बंगाल की खाड़ी में एक नया निम्न दबाव क्षेत्र विकसित होने की संभावना है।
करीब 22 डिग्री उत्तर अक्षांश के आसपास शियर जोन भी सक्रिय है। इन सभी मौसमी परिस्थितियों के कारण उत्तर छत्तीसगढ़ में बारिश की गतिविधियां आगे भी बनी रह सकती हैं।
रायपुर में बादलों का डेरा, तापमान में भी ज्यादा उछाल के आसार नहीं
राजधानी रायपुर में दिनभर बादल छाए रहने की संभावना है। कुछ स्थानों पर बारिश के साथ गरज-चमक वाली बौछारें भी पड़ सकती हैं। रायपुर में अधिकतम तापमान करीब 28 डिग्री और न्यूनतम तापमान करीब 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
प्रदेश में 31.6 डिग्री सेल्सियस के साथ दुर्ग सबसे गर्म रहा, जबकि पेंड्रारोड में न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
कुल बारिश का आंकड़ा अभी भी सामान्य, लेकिन कुछ जिलों की तस्वीर बिल्कुल अलग
छत्तीसगढ़ में 1 जून से 13 अगस्त के बीच 668.8 MM यानी करीब 26.3 इंच बारिश दर्ज की गई। इसी अवधि में सामान्य बारिश का आंकड़ा 734.4 MM यानी करीब 28.9 इंच माना जाता है।
इस हिसाब से प्रदेश में करीब 65.6 MM यानी 2.6 इंच बारिश कम हुई है और कुल कमी करीब 9 प्रतिशत है। हालांकि मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश की मौजूदा कुल बारिश सामान्य श्रेणी में बनी हुई है।
एक जिले ने बारिश के आंकड़ों में बनाई अलग पहचान
जिलेवार आंकड़ों में नारायणपुर सबसे आगे है। यहां अब तक 1043.9 MM यानी करीब 41.1 इंच बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य आंकड़ा 780.7 MM यानी 30.7 इंच है। इस तरह नारायणपुर में सामान्य से करीब 34 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है।
इसके बाद सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 948.2 MM, बीजापुर में 870.6 MM, जांजगीर में 857.3 MM और महासमुंद में 835.6 MM बारिश दर्ज की गई है।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सामान्य आंकड़े से काफी आगे निकली बारिश
सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सामान्य बारिश 598.2 MM के मुकाबले 948.2 MM रिकॉर्ड की गई है। यहां बारिश सामान्य से करीब 59 प्रतिशत अधिक है।
नारायणपुर में 34 प्रतिशत, मुंगेली में 32 प्रतिशत, बलौदाबाजार में 28 प्रतिशत, महासमुंद में 26 प्रतिशत और जांजगीर में 24 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज हुई है।
दूसरी तरफ इस जिले में बारिश की सबसे बड़ी कमी ने बढ़ाई चिंता
सरगुजा में सामान्य बारिश के मुकाबले सबसे बड़ी कमी दर्ज हुई है। यहां सामान्य 773.2 MM बारिश की तुलना में केवल 379.6 MM बारिश हुई है। यह सामान्य से करीब 51 प्रतिशत कम है।
जशपुर में बारिश की कमी 45 प्रतिशत, बेमेतरा में 40 प्रतिशत, कांकेर में 35 प्रतिशत, सूरजपुर में 22 प्रतिशत तथा बस्तर और कबीरधाम में 21-21 प्रतिशत दर्ज की गई है।
रायपुर में उलटी तस्वीर, सामान्य से ज्यादा बरस चुका है पानी
राजधानी रायपुर में 13 अगस्त तक 727.8 MM यानी करीब 28.7 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। सामान्य बारिश का आंकड़ा 641.9 MM यानी करीब 25.3 इंच है।
इस तरह रायपुर में सामान्य से करीब 85.9 MM यानी 3.4 इंच ज्यादा बारिश हुई है। प्रतिशत के हिसाब से यह सामान्य से करीब 13 प्रतिशत अधिक है।
प्रदेश के 33 जिलों में से 20 जिले सामान्य बारिश की श्रेणी में हैं। छह जिलों में सामान्य से अधिक और सात जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है।
बिजली की चमक के बीच ये सावधानी बनी सकती है सबसे जरूरी
गरज-चमक के दौरान मौसम विभाग ने लोगों को खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी है। गड़गड़ाहट सुनाई देने पर तुरंत किसी सुरक्षित और पक्के भवन में चले जाना बेहतर है।
पेड़ों के नीचे खड़े होने, बिजली की लाइनों के पास जाने और खुले मैदान में रहने से बचना चाहिए। आकाशीय बिजली के दौरान बिजली तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल भी नहीं करने की सलाह दी गई है।



















