राजनांदगांव : डोंगरगढ़ क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। ग्राम ढारा स्थित एक निजी स्कूल पर आरोप है कि उसने पांचवीं बोर्ड परीक्षा में विद्यार्थियों को शामिल कराने के लिए दूसरे स्कूल के UDISE कोड का कथित रूप से उपयोग किया। इस मामले ने न सिर्फ स्कूल प्रबंधन बल्कि पूरे शिक्षा विभाग की निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दूसरे स्कूल के UDISE कोड के इस्तेमाल का आरोप
जानकारी के अनुसार, आदर्श पब्लिक स्कूल पर आरोप है कि वह पिछले दो वर्षों से बिना वैधानिक मान्यता के संचालित हो रहा था। आरोप यह भी है कि जब विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा में शामिल कराने की प्रक्रिया शुरू हुई, तब स्कूल ने ग्राम ढारा स्थित सरस्वती शिशु मंदिर का UDISE कोड 22090612802 इस्तेमाल किया।
सरस्वती शिशु मंदिर प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि उन्हें इस प्रक्रिया की कोई जानकारी नहीं थी और न ही किसी प्रकार की अनुमति दी गई थी। इस खुलासे के बाद स्थानीय स्तर पर अभिभावकों में चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ गई है।
अंकसूचियों में अनियमितताओं के गंभीर आरोप
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि विद्यार्थियों को जारी की गई अंकसूचियों में कई जरूरी जानकारियां गायब थीं। इनमें पेन नंबर, APAAR ID, संस्था प्रमुख के हस्ताक्षर और आधिकारिक सील तक शामिल नहीं थे।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कमियां केवल तकनीकी गलती नहीं, बल्कि व्यवस्था में गंभीर चूक की ओर इशारा करती हैं, जिसका असर बच्चों के भविष्य पर पड़ सकता है।
शिक्षा विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने विभागीय निगरानी व्यवस्था को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि बिना मान्यता वाले स्कूल तक परीक्षा पंजीयन की प्रक्रिया कैसे पहुंची और यह गड़बड़ी लंबे समय तक कैसे अनदेखी रही।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू कर दी गई है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी को रिपोर्ट तैयार कर मंगलवार तक सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
शिकायत और जांच प्रक्रिया शुरू
सरस्वती शिशु मंदिर प्रबंधन ने इस मामले की शिकायत उच्च स्तर पर की है और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी ने शिकायत की पुष्टि करते हुए कहा है कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
बच्चों के भविष्य पर बड़ा सवाल
यह विवाद अब केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यह पूरे शिक्षा तंत्र की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि UDISE कोड, मान्यता और परीक्षा पंजीयन जैसी प्रक्रियाओं की नियमित और सख्त निगरानी बेहद जरूरी है, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
फिलहाल सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो यह तय करेगी कि यह मामला केवल लापरवाही है या इसके पीछे कोई बड़ी गड़बड़ी छिपी है।



















