RAIPUR : छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बीएड और डीएलएड पाठ्यक्रमों के संचालन का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। विधायक लता उसेंडी ने शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में शैक्षणिक पदों की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के साथ बीएड और डीएलएड की पढ़ाई को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा से सवाल किए।
बीएड और डीएलएड की मौजूदा व्यवस्था पर सरकार का जवाब
उच्च शिक्षा मंत्री ने सदन को बताया कि वर्तमान में बीएड और डीएलएड पाठ्यक्रमों का संचालन स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुसार भविष्य में चार वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम महाविद्यालयों के जरिए संचालित किया जाएगा।
प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लागू है एनईपी
लता उसेंडी ने यह भी जानना चाहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति प्रदेश के कितने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में लागू की जा चुकी है। इस पर मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में एनईपी लागू है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में दो वर्षीय बीएड की जगह चार वर्षीय पाठ्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
अजय चंद्राकर ने पूछा, चार वर्षीय बीएड कौन से कॉलेज में होगा
मंत्री के जवाब के बाद विधायक अजय चंद्राकर ने पूरक प्रश्न करते हुए पूछा कि प्रदेश में ऐसे कितने महाविद्यालय हैं, जहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप चार वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम शुरू किया जा सके। इस पर मंत्री ने स्वीकार किया कि फिलहाल छत्तीसगढ़ का एक भी कॉलेज निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करता।
कॉलेजों को अपग्रेड करने के लिए बनी टास्क फोर्स
अजय चंद्राकर ने सवाल उठाया कि जब दो वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम बंद हो जाएगा, तब मौजूदा कॉलेजों को नई व्यवस्था के अनुरूप तैयार करने की सरकार की क्या योजना है। मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि चार वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम के संचालन के लिए बी प्लस प्लस श्रेणी के मानकों वाले संस्थानों की आवश्यकता होगी। चूंकि प्रदेश में अभी ऐसा कोई कॉलेज उपलब्ध नहीं है, इसलिए आवश्यक मापदंड तय करने और मौजूदा संस्थानों को उन्नत बनाने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है।
कोंडागांव में बीएड कॉलेज को लेकर भी उठा सवाल
विधायक अजय चंद्राकर ने कोंडागांव में दो वर्षीय अथवा चार वर्षीय बीएड कॉलेज शुरू करने की प्रक्रिया और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप संस्थानों के विकास की योजना के बारे में भी जानकारी मांगी। इस पर मंत्री ने दोहराया कि सरकार टास्क फोर्स की अनुशंसाओं के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार करेगी, ताकि भविष्य में महाविद्यालयों को नए मानकों के अनुरूप विकसित किया जा सके।



















