जिस नाम तक पहुंचना आसान नहीं था, आखिर पुलिस ने कैसे सुलझाई इस पूरे नेटवर्क की कड़ी?

 छत्तीसगढ़ : ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ चल रही कार्रवाई ने एक और बड़ा मोड़ ले लिया है। लंबे समय से जांच एजेंसियों के रडार पर रहे ‘शिवा बुक’ एप से जुड़े मामले में पुलिस ने कथित मुख्य संचालक तरुण वर्मा को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता, आईटी अधिनियम और छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किया गया है। इस मामले में इससे पहले तीन लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।

जांच में सामने आया मुंबई कनेक्शन

छुईखदान पुलिस की जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपी राहुल देवांगन ने कई अहम जानकारियां दी हैं। पूछताछ में उसने बताया कि वर्ष 2021 से वह मुंबई के पलावा सिटी स्थित फ्लैट से ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क चला रहा था। उसने यह भी स्वीकार किया कि करीब छह महीने पहले वह वापस छत्तीसगढ़ लौट आया था।

पैनल के जरिए होता था कारोबार

पुलिस के अनुसार राहुल देवांगन ने तिल्दा निवासी तरुण वर्मा से ‘शिवा बुक’ का पैनल लिया था। इस व्यवस्था के तहत हर लेनदेन पर तरुण वर्मा को लगभग 10 प्रतिशत कमीशन मिलता था। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि यूपीआई के माध्यम से उन्हें 8 से 10 लाख रुपये तक कमीशन प्राप्त हुआ।

डिजिटल सबूत मिटाने की कोशिश हुई नाकाम

कार्रवाई से पहले आरोपियों ने सट्टेबाजी में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन नष्ट कर दिया था, ताकि जांच एजेंसियों को कोई डिजिटल सुराग न मिल सके। इसके बावजूद पुलिस ने तलाशी के दौरान दो मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, भारतीय स्टेट बैंक की पासबुक, क्रेडिट कार्ड और दो एटीएम कार्ड जब्त किए हैं।

पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी पुलिस

पुलिस अब इस ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, आर्थिक लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी अहम खुलासे होने की संभावना है।

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