नाबालिग की गर्भसमापन याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, मेडिकल बोर्ड गठित करने के दिए निर्देश

 बिलासपुर : हाईकोर्ट ने अवांछित गर्भावस्था से जुड़ी एक नाबालिग की याचिका पर सुनवाई करते हुए रायपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को मेडिकल परीक्षण कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि गर्भसमापन पर कोई भी फैसला विशेषज्ञ चिकित्सकों की रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।

गर्भसमापन की अनुमति के लिए पहुंची थी हाईकोर्ट

याचिका में कहा गया कि पीड़िता घटना के समय नाबालिग थी और गर्भावस्था अवांछित है। याचिकाकर्ता ने गर्भसमापन की अनुमति देने की मांग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला दिया। वहीं राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि किसी भी आदेश से पहले पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण कराना जरूरी है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों का बोर्ड करेगा स्वास्थ्य परीक्षण

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि नाबालिग अपने वैधानिक अभिभावक के साथ 17 जुलाई 2026 को रायपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के समक्ष उपस्थित हो। अदालत ने सीएमएचओ को विशेषज्ञ चिकित्सकों का मेडिकल बोर्ड गठित करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें महिला स्त्रीरोग विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा।

गर्भसमापन की सुरक्षा और स्वास्थ्य जोखिम का होगा आकलन

मेडिकल बोर्ड यह जांच करेगा कि गर्भसमापन चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित है या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि इस प्रक्रिया से नाबालिग के जीवन या स्वास्थ्य पर किसी प्रकार का गंभीर खतरा तो नहीं है। जांच के आधार पर विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

पीड़िता की गरिमा और सुविधा का रखने के निर्देश

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि मेडिकल परीक्षण के समय परिवार की सहमति से एक वयस्क महिला सदस्य पीड़िता के साथ मौजूद रहे। अदालत ने निर्देश दिया कि जांच के दौरान पीड़िता को किसी प्रकार की असुविधा न हो और सीएमएचओ परिवहन सहित सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएं। परीक्षण पूरा होने के बाद पीड़िता को सुरक्षित रूप से उसके अभिभावक के साथ घर भेजने के भी निर्देश दिए गए हैं।

20 जुलाई तक अदालत में पेश होगी मेडिकल रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने रायपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को 20 जुलाई 2026 तक मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि गर्भसमापन संभव है या नहीं, प्रक्रिया से जुड़े संभावित चिकित्सकीय जोखिम क्या हैं और इसका पीड़िता के स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

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