छत्तीसगढ़ : बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद न्यायालय ने निर्णय आरक्षित कर दिया। अब इस बहुप्रतीक्षित मामले में 31 अगस्त 2026 को अदालत अपना फैसला सुनाएगी।
10 अगस्त से शुरू हुई थी अंतिम सुनवाई
मामले में अंतिम बहस 10 अगस्त से शुरू हुई थी, जो करीब तीन दिनों तक चली। बुधवार को बचाव पक्ष ने अपनी दलीलें पूरी कीं, जिसके बाद अभियोजन पक्ष ने जवाबी तर्क न्यायालय के सामने रखे। दोपहर करीब 2 बजे तक सभी पक्षों की बहस समाप्त होने के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रखते हुए निर्णय की तारीख 31 अगस्त निर्धारित कर दी।
13 वर्षों से चल रही थी न्यायिक प्रक्रिया
साल 2013 में हुए इस बड़े नक्सली हमले की जांच लंबे समय से एनआईए की विशेष अदालत में चल रही थी। करीब 13 वर्ष तक चली सुनवाई के बाद अब मामला अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अदालत का फैसला इस चर्चित मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ के सबसे भयावह नक्सली हमलों में से एक था झीरम कांड
25 मई 2013 को विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान यह हमला हुआ था। सुकमा में आयोजित सभा के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला जगदलपुर की ओर लौट रहा था। इसी दौरान झीरम घाटी में नक्सलियों ने रास्ते में पेड़ गिराकर वाहनों को रोक दिया और घात लगाकर हमला कर दिया।
बताया जाता है कि बड़ी संख्या में मौजूद नक्सलियों ने काफिले पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें 30 से अधिक लोगों की जान चली गई। इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल सहित कई अन्य लोगों की मृत्यु हुई थी। महेंद्र कर्मा पर हमले के दौरान बड़ी संख्या में गोलियां चलाई गई थीं।
31 अगस्त पर टिकी सभी की नजरें
करीब डेढ़ दशक से न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा रहे इस मामले में अब सभी की निगाहें 31 अगस्त पर हैं, जब एनआईए की विशेष अदालत अपना अंतिम फैसला सुनाएगी। यह निर्णय छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित नक्सली हमलों में से एक मामले में लंबे समय से चल रहे कानूनी इंतजार का अंत करेगा।



















