धरसीवां फैक्ट्री विस्फोट के बाद मुआवजे पर विवाद, आदिवासी श्रमिकों के परिजनों के साथ भेदभाव के आरोप

 रायपुर :  धरसीवां क्षेत्र स्थित बेंद्री की 3डी इनोवेशन फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद अब मुआवजे को लेकर विवाद गहरा गया है। हादसे में जान गंवाने वाले मध्यप्रदेश के दो आदिवासी श्रमिकों के परिजनों के साथ भेदभाव किए जाने के आरोप सामने आए हैं। इस मामले ने मुआवजा वितरण की प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

ब्लास्ट में तीन श्रमिकों की हुई थी मौत

7 जुलाई की शाम बेंद्री स्थित फैक्ट्री में ऑक्सीजन सिलेंडर फटने से हुए विस्फोट में तीन श्रमिकों की मौत हो गई थी। धमाका इतना भीषण था कि मृतकों के शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए। घटना के बाद श्रमिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने मौके पर पहुंचकर दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की थी।

पुलिस के अनुसार, मृतकों में मध्यप्रदेश के मंडला जिले के लाल सिंह और कमल सिंह मरावी तथा छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले के अरुण पांडे शामिल थे। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए और उनके गृह गांवों में अंतिम संस्कार किया गया।

मुआवजे की राशि को लेकर उठे सवाल

घटना के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शोक व्यक्त करते हुए कहा था कि कंपनी प्रबंधन मृतकों के प्रत्येक परिजन को 30-30 लाख रुपये का मुआवजा देगा। आरोप है कि इस घोषणा के अनुरूप जांजगीर निवासी अरुण पांडे के परिवार को 29 लाख रुपये का चेक और एक लाख रुपये नकद दिए गए, जबकि मंडला के दोनों आदिवासी श्रमिकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये का चेक और एक-एक लाख रुपये नकद ही दिए गए।

इसी अंतर को लेकर भेदभाव के आरोप लगाए जा रहे हैं और सवाल उठ रहे हैं कि समान हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों को अलग-अलग मुआवजा क्यों दिया गया।

परिवार का इकलौता सहारा था कमल मरावी

मृतक कमल मरावी के पिता संभर सिंह मरावी ने बताया कि उनके बेटे की मौत के बाद परिवार को 20 लाख रुपये का चेक और एक लाख रुपये नकद मिले हैं। उन्होंने कहा कि कमल ही पूरे परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। परिवार में उसकी मां, पत्नी और छोटी बहन हैं, जिनकी जिम्मेदारी उसी पर थी। इसी तरह लाल सिंह के परिजनों को भी समान राशि मिलने की जानकारी सामने आई है।

भेदभाव के आरोपों पर उठी आवाज

मुआवजे में अंतर को लेकर बजरंग दल के नेता बीरेंद्र विश्वकर्मा ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार एक मृतक के परिजनों को 30 लाख रुपये दिए गए, तो अन्य दो मृतकों के परिवारों को कम राशि देने का आधार क्या है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और सभी पीड़ित परिवारों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग की।

प्रबंधन की ओर से नहीं आया जवाब

मामले में कंपनी प्रबंधन का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क करने पर किसी भी अधिकारी ने प्रतिक्रिया नहीं दी। फिलहाल मुआवजे में कथित असमानता को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है, जबकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

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