पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म मामले में अदालत का फैसला, दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा

 कांकेर :  कोतवाली थाना क्षेत्र में पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विभा पाण्डेय की अदालत में मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद यह फैसला सुनाया गया।घटना मार्च 2026 की बताई गई है। पुलिस में शिकायत दर्ज होने के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ न्यायालय में अभियोग पत्र पेश किया था।

घर से बच्ची को ले जाने का था आरोप

मामले के अनुसार, पांच साल की बच्ची अपने घर में सो रही थी। इसी दौरान दोनों आरोपियों पर उसे घर से अपने साथ ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा था। घटना की जानकारी सामने आने के बाद बच्ची के परिजनों ने पुलिस से शिकायत की थी।मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की और घटना से जुड़े साक्ष्य जुटाए। इसके बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की गई।

पुलिस जांच के बाद अदालत में पेश किया गया चालान

पुलिस ने विवेचना के दौरान मामले से जुड़े साक्ष्य और दस्तावेज एकत्र किए। जांच पूरी होने के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया गया। इसके बाद प्रकरण की न्यायिक सुनवाई शुरू हुई।सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपों के समर्थन में उपलब्ध साक्ष्य और दस्तावेज अदालत के समक्ष रखे। मामले से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं।

साक्ष्यों के परीक्षण के बाद दोनों आरोपी दोषी करार

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विभा पाण्डेय की अदालत ने सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और मामले से जुड़े तथ्यों का परीक्षण किया। इसके बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी माना और दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।अदालत के फैसले के साथ मार्च 2026 में सामने आए इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो गई।

नाबालिग पीड़िता की पहचान रखी गई गोपनीय

मामले में पीड़ित बच्ची की पहचान और उससे जुड़ी व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। नाबालिग से संबंधित मामलों में पीड़ित की पहचान गोपनीय रखने के कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए बच्ची का नाम या ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं रखी गई है, जिससे उसकी पहचान उजागर हो।पुलिस जांच से लेकर न्यायालय में सुनवाई तक बच्ची की पहचान को सुरक्षित रखा गया। अदालत के फैसले के बाद दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा भुगतनी होगी।

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