CGPSC भर्ती घोटाला: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पेपर लीक को बताया युवाओं के भविष्य से खिलवाड़

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग भर्ती घोटाले में आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर को बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए सख्त टिप्पणी की कि पेपर लीक करना मेहनत करने वाले युवाओं के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है।

सीबीआई जांच के घेरे में पूरा मामला, बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप
इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो कर रही है। आरोप है कि CGPSC परीक्षाओं में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुईं और चयन प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।

50 से 60 लाख तक की डील के आरोप, चयन के नाम पर खेल
आरोपों के अनुसार उत्कर्ष चंद्राकर ने चयन के बदले अभ्यर्थियों से 50 से 60 लाख रुपये तक की मांग की थी। जांच में यह भी सामने आया है कि परीक्षा से पहले कई अभ्यर्थियों को अलग-अलग स्थानों पर ठहराया गया और वहां तैयारी कराई गई।

रिजॉर्ट और होटल बने परीक्षा से पहले का ‘क्लासरूम’
रिपोर्ट के मुताबिक अभ्यर्थियों को रायपुर के विभिन्न स्थानों जैसे सिद्धि विनायक पैलेस, बारनवापारा रिजॉर्ट और होटल वेंकटेश इंटरनेशनल में रखा गया। यहीं पर कथित तौर पर प्रश्नपत्र और उत्तर रटवाने की व्यवस्था की गई।

पेपर लीक और मोबाइल से सवाल, गवाह के बयान से खुलासा
जांच में यह भी सामने आया कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र और उत्तर लीक किए गए। एक अहम गवाह के बयान के अनुसार 25 लाख रुपये की डील का भी जिक्र हुआ है, जिसमें परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा की गई थी।

सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल, 2020 से 2022 तक जांच का दायरा
यह पूरा मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आरोप है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की जगह प्रभाव और पहुंच का इस्तेमाल किया गया।

171 पदों की भर्ती में गड़बड़ी के आरोप, चयन सूची भी जांच के घेरे में
CGPSC 2021 भर्ती में 171 पदों के लिए परीक्षा हुई थी। प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के बाद 170 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी की गई थी, जो अब जांच के दायरे में है।

हाईकोर्ट का संदेश साफ, परीक्षा प्रणाली से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं
अदालत की टिप्पणी से यह स्पष्ट है कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता से किसी भी तरह का समझौता गंभीर अपराध माना जाएगा। अब सभी की नजर सीबीआई जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी है।

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