भीलवाड़ा में ‘बिना नाम की गौशाला’ में कचरा खाते गौवंश, नगर निगम का टिपर रोज़ कचरा उड़ेल कर चला जाता है

-भीलवाड़ा में सिस्टम की बड़ी नाकामी! HRJ प्लाज़ा के पीछे का हैं मामला

पंकज आडवाणी

भीलवाड़ा। शहर के बीचोंबीच HRJ प्लाज़ा के पीछे का नज़ारा नगर निगम की लापरवाही का सबसे बड़ा सबूत बन गया है। यहां मौजूद एक बिना नाम की गौशाला में गौवंश हरे चारे की जगह कचरा खा रहा है, और निगम का ऑटो-टिपर आकर उसी कचरे के ढेर को और बड़ा कर देता है। सवाल यह उठता है—क्या शहर की सफाई व्यवस्था और गौ-संरक्षण का काम भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है?

तस्वीरें साफ दिखाती हैं कि प्लास्टिक, गंदगी और सड़ांध के बीच खड़े ये गौवंश किस हाल में जी रहे हैं। कचरा खाने से उनकी जान खतरे में पड़ रही है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की नींद आज तक नहीं टूटी। न गौशाला का नाम है, न प्रबंधन—बस खुली लापरवाही और कागज़ों में विकास के ढोल।

स्थानीय लोगों ने कटाक्ष करते हुए कहा,

“निगम का टिपर आता है—कचरा गिराता है और चला जाता है। गायें वहीं से ‘अपना हिस्सा’ उठा लेती हैं। अगर यही गौ-संरक्षण है, तो शर्म की बात है।”

राहगीरों का कहना है कि शिकायतें इतनी की गईं कि अब गिनती भी याद नहीं, लेकिन कार्रवाई का हाल वही—शून्य। कचरा ढेर बढ़ता जा रहा है, बदबू बढ़ती जा रही है और जिम्मेदारी घटती जा रही है।

सीधी मांगें:

HRJ प्लाज़ा क्षेत्र को कचरा फेंकने का ‘डंपिंग ज़ोन’ बनाने पर तत्काल रोक।

कचरा निस्तारण की सही व्यवस्था और सफाई

प्लास्टिक व गंदगी खिलाने वालों पर जुर्माना।

फिलहाल, HRJ प्लाज़ा के पीछे की यह स्थिति साफ बताती है कि भीलवाड़ा में कचरा प्रबंधन और गौ-सुरक्षा दोनों की हालत ‘राम भरोसे’ चल रही है।