रायपुर: छत्तीसगढ़ में बस से यात्रा करने वाले लोगों को अब अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी। राज्य में यात्री बसों के किराए में बढ़ोतरी किए जाने से रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और अन्य यात्रियों का खर्च बढ़ने वाला है। परिवहन विभाग की नई अधिसूचना के मुताबिक, साधारण बसों में प्रति किलोमीटर किराया 1 रुपये से बढ़ाकर 1.75 रुपये कर दिया गया है। वहीं, शुरुआती 5 किलोमीटर के सफर का न्यूनतम किराया भी 8 रुपये से बढ़कर 10 रुपये हो गया है।किराए में इस बदलाव का असर छोटी दूरी के साथ लंबी दूरी की यात्रा पर भी पड़ेगा। इसके अलावा डीलक्स, लग्जरी और एसी स्लीपर बसों के टिकट भी महंगे होने की जानकारी सामने आई है।
रायपुर से बिलासपुर और जगदलपुर जाने वालों पर कितना असर?
नई दरों के बाद अलग-अलग रूट पर यात्रा करने वाले यात्रियों को पहले के मुकाबले अधिक भुगतान करना होगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रमुख मार्गों पर किराए में इस तरह का अंतर बताया गया है।
- रायपुर से बिलासपुर: पहले 133 रुपये किराया था, जो अब 228 रुपये बताया गया है। यानी 95 रुपये अधिक।
- रायपुर से जगदलपुर: पहले 300 रुपये देने पड़ते थे, जबकि नया किराया 521 रुपये बताया गया है। इससे 221 रुपये की बढ़ोतरी होगी।
- रायपुर से अंबिकापुर: उपलब्ध विवरण के अनुसार, यात्रा का खर्च 230 रुपये बढ़ने की बात कही गई है।
- रायपुर से जशपुर: इस मार्ग पर किराए में 346 रुपये की बढ़ोतरी बताई गई है।
इन आंकड़ों के आधार पर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के मासिक बजट पर खासा असर पड़ सकता है। हालांकि, टिकट की वास्तविक कीमत बस की श्रेणी, दूरी और लागू किराया नियमों के अनुसार अलग हो सकती है।
एक साल के भीतर दूसरी बार बढ़ा बस किराया
छत्तीसगढ़ में बस किराए में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब यात्री पहले ही रोजमर्रा के खर्चों को लेकर दबाव महसूस कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले साल प्रति किलोमीटर किराया 1.25 रुपये से घटाकर 1 रुपये किया गया था। इससे यात्रियों को कुछ राहत मिली थी।अब किराया बढ़ाकर 1.75 रुपये प्रति किलोमीटर किए जाने से उस राहत का लाभ काफी हद तक समाप्त हो गया है। खासतौर पर उन लोगों को अधिक खर्च करना पड़ेगा, जो काम, पढ़ाई या दूसरे जरूरी कारणों से नियमित रूप से बसों से यात्रा करते हैं।
बस संचालक क्यों कर रहे थे किराया बढ़ाने की मांग?
बस ऑपरेटर लंबे समय से किराया बढ़ाने की मांग कर रहे थे। उनका तर्क था कि डीजल, टायर, स्पेयर पार्ट्स और बसों के रखरखाव पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में पुराने किराए पर बसों का संचालन करना आर्थिक रूप से मुश्किल होता जा रहा था।बस संचालकों ने किराया नहीं बढ़ाए जाने की स्थिति में बसें खड़ी करने और हड़ताल करने की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद परिवहन विभाग ने 8 अक्टूबर को नई किराया दरों से संबंधित अधिसूचना जारी की।हालांकि, किराया बढ़ाने की मांग और सरकार के फैसले के बीच यात्रियों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। बस सेवा पर निर्भर लोगों के लिए किराए में बढ़ोतरी सीधे उनके दैनिक खर्च को प्रभावित करती है।
प्रदेश की 5 हजार साधारण बसों से सफर करने वालों पर ज्यादा असर
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 13 हजार से अधिक बसें पंजीकृत हैं। इनमें करीब 5 हजार साधारण बसें बताई गई हैं। इन बसों में बड़ी संख्या में निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोग यात्रा करते हैं।दैनिक यात्रियों के लिए किराए में बढ़ोतरी का मतलब महीने के कुल खर्च में इजाफा होना है। वहीं, लंबी दूरी के यात्रियों को हर यात्रा पर पहले से ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ सकती है।
यात्रियों के बजट पर बढ़ेगा दबाव
बस किराए में नई बढ़ोतरी से परिवहन खर्च बढ़ना तय है। खासतौर पर उन परिवारों पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है, जिनके सदस्य नौकरी, पढ़ाई या छोटे कारोबार के लिए नियमित रूप से दूसरे शहरों की यात्रा करते हैं।अब यात्रियों की नजर इस बात पर रहेगी कि नई दरें किस तरह लागू की जाती हैं और अलग-अलग श्रेणी की बसों में अंतिम किराया कितना निर्धारित होता है।



















