सिन्धी भाषा, संस्कृति और सामाजिक जागरुकता को मजबूत बनाने पर हुआ व्यापक मंथन
पुणे में भारतीय सिन्धु सभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रतिनिधि सभा सफलतापूर्वक संपन्न हुई। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे प्रतिनिधियों ने संगठन के विस्तार, सिन्धी भाषा और संस्कृति के संरक्षण, सामाजिक दायित्वों तथा आगामी छह माह की कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। बैठक में समाज के समक्ष मौजूद चुनौतियों का समाधान सामूहिक प्रयासों से करने का संकल्प भी लिया गया।

112 प्रतिनिधियों ने रखा अपना पक्ष
आज़ाद नगर मार्ग स्थित विमला जीवन झूलेलाल मंदिर में आयोजित इस बैठक में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों से 112 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता, भगवान झूलेलाल, हिंगलाज भवानी तथा संस्था के संस्थापक अध्यक्ष झामटमल वाधवानी के चित्रों पर दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुआ।
इतिहास और संस्कृति से नई पीढी को जोडने पर जोर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक भैयाजी जोशी ने कहा कि सिन्ध का इतिहास गौरव और समृद्ध परंपराओं से भरा हुआ है। समाज के प्रत्येक बालक और बालिका को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि समाज में बढ रही कुरीतियों को रोकने के लिए भारतीय सिन्धु सभा को और अधिक सक्रिय तथा प्रभावी भूमिका निभानी होगी।
समाज के हर व्यक्ति तक पहुंचने का आह्वान
संस्था के संरक्षक एवं भोपाल विधायक भगवानदास सबनानी ने कहा कि यदि समाज को कुरीतियों से मुक्त करना है तो संगठन को प्रत्येक शहर और प्रत्येक परिवार तक पहुंच बनानी होगी। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों से जोडना समय की सबसे बडी आवश्यकता है।
संगठन विस्तार से लेकर आर्थिक मजबूती तक हुई चर्चा
बैठक के दौरान संगठन विस्तार में सोशल मीडिया की भूमिका, स्वास्थ्य सेवाएं और संगठन, सिन्धु दर्शन यात्रा 2026, संगठन की आर्थिक मजबूती सहित अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर अलग-अलग सत्र आयोजित किए गए। इन विषयों पर लधाराम नागवानी, घनश्यामदास कुकरेजा, चेतन तारखानी, सुरेन्द्र लछवानी, मनीष मलानी, निखिल खिलवानी, डॉ. अनिल खत्री तथा दिनेश टिहल्यानी ने अपने विचार साझा किए।
राष्ट्रीय महामंत्री ने संभाला संचालन
बैठक का संचालन राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. मायाबेन कोडनानी ने किया। आयोजन को सफल बनाने में सुरेश हेमनानी, तुलसीदास साधवानी, दिनेश दोदानी, जितेंद्र हीरानंदानी, जितेंद्र आडवाणी, पवन ओटवानी और रेशमा खियानी सहित अनेक कार्यकर्ताओं का उल्लेखनीय योगदान रहा। कार्यक्रम का समापन पल्लव प्रार्थना और राष्ट्रगीत के साथ हुआ।



















