सरकारी बसों की जांच में बड़ा खुलासा, 107 में 35 बसें बेहद जर्जर और इमरजेंसी गेट के सामने लगाई गई अतिरिक्त सीटें

 रायपुर:  मंत्रालय और संचालनालय के अधिकारी कर्मचारियों के लिए संचालित बसों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। मंत्रालय बस अग्निकांड और बसों की खराब स्थिति से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद RTO ने नगर निगम की बसों की भौतिक जांच की। जांच में कई बसों की स्थिति चिंताजनक पाई गई।

107 बसों की जांच में सिर्फ 10 मिलीं सही हालत में

RTO की जांच के दौरान मंत्रालय और संचालनालय में चलने वाली कुल 107 बसों का निरीक्षण किया गया। इनमें 35 बसें अत्यंत कंडम स्थिति में मिलीं, जबकि 62 बसों को भी खराब स्थिति में बताया गया है। जांच में सिर्फ 10 बसें ऐसी मिलीं, जिन्हें सही हालत में पाया गया।इन आंकड़ों के सामने आने के बाद सरकारी बसों में रोजाना सफर करने वाले अधिकारी कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

ज्यादा सीट लगाने के लिए इमरजेंसी गेट से की गई छेड़छाड़

जांच के दौरान सबसे अहम गड़बड़ी बसों के इमरजेंसी गेट से जुड़ी सामने आई। ज्यादा यात्रियों को बैठाने के लिए इमरजेंसी गेट के रास्ते को सीट लगाकर बाधित किए जाने की जानकारी मिली है।बताया गया कि बस के आगे और पीछे मौजूद इमरजेंसी गेट के पास दो दो सीटें लगा दी गई हैं। इस तरह एक बस में चार अतिरिक्त सीटें बढ़ाई गई हैं। नियमों के लिहाज से इमरजेंसी निकास के रास्ते में इस तरह सीट लगाना गंभीर सुरक्षा समस्या पैदा कर सकता है।

हादसा होने पर इमरजेंसी निकास बंद होने से बढ़ सकता है खतरा

अगर ऐसी बस किसी दुर्घटना का शिकार होती है तो यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने में परेशानी हो सकती है। इमरजेंसी गेट के सामने सीटें होने के कारण आपात स्थिति में अधिकारी और कर्मचारी इस निकास का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।यही वजह है कि बसों की फिटनेस के साथ साथ उनमें किए गए बदलावों की भी जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

एक कर्मचारी के परिवहन के लिए 3060 रुपये का भुगतान, करीब 5 हजार लोग करते हैं सफर

जानकारी के मुताबिक इन बसों के संचालन का भुगतान एक निर्धारित व्यवस्था के तहत किया जाता है। सामान्य प्रशासन विभाग NRDA को भुगतान करता है, इसके बाद NRDA की ओर से रायपुर नगर निगम को राशि दी जाती है। नगर निगम आगे ठेका कंपनी दुर्गम्बा बस सर्विस को भुगतान करता है।बताया गया है कि एक कर्मचारी के परिवहन के लिए सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से 3060 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। करीब 5 हजार अधिकारी और कर्मचारी इन बसों के जरिए रोजाना कार्यालय आने जाने की सुविधा लेते हैं।

बसों की फिटनेस और सुरक्षा व्यवस्था पर अब उठ रहे बड़े सवाल

107 बसों की जांच में बड़ी संख्या में वाहनों की खराब स्थिति सामने आने के बाद बस संचालन की निगरानी और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। खासतौर पर इमरजेंसी निकास के साथ छेड़छाड़ का मामला यात्रियों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा है। RTO की जांच के बाद अब आगे की कार्रवाई और सुधार को लेकर तस्वीर साफ होने का इंतजार है।

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