बिलासपुर : मानव तस्करी और पॉक्सो एक्ट से जुड़े एक संवेदनशील मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब अदालत में पीड़िता और प्रमुख गवाहों ने पुलिस की पूरी कहानी को खारिज कर दिया। जिस मामले में GRP ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, उसी केस में अब एनआईए स्पेशल कोर्ट ने दोनों को बरी कर दिया है।
GRP की कार्रवाई से शुरू हुआ था मामला
जानकारी के अनुसार, रेलवे पुलिस (GRP) ने 31 अक्टूबर 2021 को एक नाबालिग लड़की को कथित मानव तस्करों से रेस्क्यू करने का दावा किया था। पुलिस ने इस आधार पर दो आरोपियों के खिलाफ मानव तस्करी और पॉक्सो एक्ट के तहत FIR दर्ज की और उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया था।पुलिस का आरोप था कि लड़की को बहला फुसलाकर आर्थिक लालच देकर मध्य प्रदेश ले जाया जा रहा था और उसे बेचने की साजिश रची गई थी।
कोर्ट में बदल गया पूरा बयान और कहानी
एनआईए स्पेशल कोर्ट में सुनवाई के दौरान मामला पूरी तरह पलट गया। पीड़िता ने अदालत में बयान दिया कि वह किसी मानव तस्करी का शिकार नहीं हुई थी, बल्कि घर में डांट से नाराज होकर खुद ट्रेन में बैठकर बिलासपुर आ गई थी।उसने यह भी कहा कि उसे किसी ने बेचा नहीं और न ही किसी प्रकार का जबरन ले जाने का प्रयास हुआ था।इसके साथ ही पीड़िता के नाना ने भी कोर्ट में उसकी बात का समर्थन किया और कहा कि बच्ची अपनी मर्जी से घर से निकली थी और परिवार उसे ढूंढते हुए स्टेशन पहुंचा था।
गवाहों के बयान से कमजोर पड़ा मामला
मामले में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब स्वतंत्र गवाहों ने पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए। गवाहों ने कोर्ट में कहा कि उनके सामने कोई उचित जब्ती या ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी, जैसा पुलिस ने रिकॉर्ड में बताया था।
कोर्ट ने क्या कहा अपने फैसले में
एनआईए स्पेशल कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल संदेह या अनुमान के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष “संदेह से परे” आरोप साबित करने में पूरी तरह असफल रहा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि जब प्रमुख गवाह अपने बयान से मुकर जाएं और ठोस कानूनी सबूत न हों, तो सिर्फ पुलिस की विवेचना के आधार पर दोष सिद्ध करना संभव नहीं है।
दोनों आरोपी बरी, जेल से रिहा करने का आदेश
अदालत ने दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से बरी करते हुए तत्काल रिहाई के आदेश दिए। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि जब्त की गई राशि को अपील अवधि के बाद वापस किया जाए।दोनों आरोपी करीब 7 महीने से अधिक समय से जेल में बंद थे, जिन्हें अब कोर्ट के आदेश के बाद रिहा कर दिया गया है।
मामले ने उठाए जांच और विवेचना पर गंभीर सवाल
इस फैसले के बाद GRP की जांच प्रक्रिया और विवेचना पर भी सवाल उठने लगे हैं। अदालत के इस निर्णय ने पूरे केस की दिशा ही बदल दी है और यह मामला अब न्यायिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन गया है।



















