बिलासपुर। 14 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम निर्णय में राज्य शासन द्वारा दायर आपराधिक अपील को केवल 108 दिन की देरी के आधार पर खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि विभागीय प्रक्रियाओं का हवाला देकर कानूनी समय सीमा की अनदेखी को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
कोरबा विशेष न्यायालय के फैसले को दी गई थी चुनौती
यह मामला कोरबा जिले से जुड़ा हुआ है, जहां विशेष न्यायालय (एससी/एसटी एक्ट) ने आरोपी संजय कुमार यादव को साक्ष्य के अभाव में आरोपों से मुक्त कर दिया था। इसी फैसले को राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
SC/ST एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में दर्ज था मामला
आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(आर) और 3(1)(एस) के तहत मामला दर्ज किया गया था। यह प्रकरण कोरबा के अजाक थाना क्षेत्र से संबंधित था।
108 दिन की देरी बनी अपील खारिज होने का कारण
राज्य सरकार की ओर से दाखिल अपील में 108 दिनों की देरी हुई थी। सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि फाइल प्रक्रिया, विधि विभाग की मंजूरी और महाधिवक्ता की राय लेने में समय लगने के कारण देरी हुई, जो जानबूझकर नहीं थी।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, विभागीय लापरवाही स्वीकार नहीं
न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल ने सुनवाई के दौरान कहा कि केवल विभागीय प्रक्रिया के आधार पर देरी को माफ नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य को भी लिमिटेशन कानून का पालन करना अनिवार्य है और सरकारी लापरवाही को उचित कारण नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला, सख्त रुख अपनाया
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को किसी प्रकार की विशेष छूट नहीं दी जा सकती। अदालत ने एक पुराने मामले का उल्लेख करते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 1788 दिनों की देरी पर भी अपील खारिज कर दी थी।
मुख्य अपील भी स्वतः खारिज, सरकार को झटका
इन सभी तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने देरी माफी याचिका खारिज कर दी, जिसके चलते राज्य सरकार की मुख्य आपराधिक अपील भी स्वतः समाप्त हो गई। इस फैसले को न्यायिक व्यवस्था में समय सीमा पालन को लेकर एक सख्त संदेश माना जा रहा है।



















