बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने पहले के आदेश को निरस्त करते हुए CBI की अपील स्वीकार कर ली है और मामले के प्रमुख आरोपी अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर फिर खुला मामला
इस मामले में CBI और दिवंगत नेता रामअवतार जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी ने अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को मामले की पुनर्सुनवाई के निर्देश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही केस की फाइल दोबारा खोली गई।
पहले खारिज हो चुकी थी CBI की याचिका
गौरतलब है कि वर्ष 2011 में हाईकोर्ट ने देरी के आधार पर CBI की याचिका खारिज कर दी थी। साथ ही सतीश जग्गी की याचिका भी स्वीकार नहीं की गई थी। इन फैसलों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जहां से राहत मिलने के बाद मामला दोबारा सुनवाई में आया।
डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद दिया आदेश
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। इसके बाद अदालत ने CBI की अपील को स्वीकार करते हुए आरोपी को सरेंडर करने का आदेश जारी किया।
2003 में हुई थी सनसनीखेज हत्या
4 जून 2003 को NCP नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में शुरुआत में 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। बाद में कुछ लोग सरकारी गवाह बन गए और कई आरोपियों को दोषी करार दिया गया।
राजनीतिक रूप से भी अहम रहा मामला
रामअवतार जग्गी, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे और NCP में अहम जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस वजह से यह मामला राजनीतिक रूप से भी काफी चर्चित रहा।
अब आगे क्या
हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब मामले में नई कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। आरोपी के सरेंडर के बाद आगे की सुनवाई और कार्रवाई तय की जाएगी, जिस पर प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।



















