डिप्टी कलेक्टर दिलीप उइके पर दुष्कर्म और शोषण का केस, कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

डिप्टी कलेक्टर पर गंभीर आरोप

बालोद / जिले में महिला आरक्षक ने बीजापुर में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर दिलीप उइके पर दुष्कर्म, गर्भपात और आर्थिक शोषण का गंभीर आरोप लगाया है। मामले की सुनवाई के दौरान जिला न्यायालय ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

पीड़िता का आरोप

महिला ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराते हुए बताया कि दिलीप उइके से उसकी मुलाकात 2017 में आईटीआई में पढ़ाई के दौरान हुई थी। दोनों के बीच संबंध बने और आरोपी ने शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण किया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि 2017 से 2025 तक वह कई बार गर्भवती हुई, लेकिन आरोपी ने दवाइयां खिलाकर जबरन गर्भपात करा दिया। इसके अलावा, दिलीप ने उससे आर्थिक मदद भी ली और करीब 3.30 लाख रुपये उसके खाते में ट्रांसफर कराए।

आरोपी पक्ष और कोर्ट का फैसला

कोर्ट में आरोपी पक्ष के वकील ने दलील दी कि यह मामला ब्लैकमेलिंग का है और पीड़िता झूठा आरोप लगा रही है। हालांकि, पीड़िता ने बैंक स्टेटमेंट और अन्य सबूत प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

पुलिस की जांच जारी

डौंडी थाना में मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। एएसपी मोनिका ठाकुर ने कहा कि पीड़िता के बयान और सबूतों के आधार पर अपराध पंजीबद्ध किया गया है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पृष्ठभूमि

बता दें कि डिप्टी कलेक्टर दिलीप उइके बीजापुर के भोपालपटनम जनपद में सीईओ पद पर पदस्थ रह चुके हैं और उस दौरान वे चर्चाओं में भी रहे थे। अब यह मामला उनके करियर के लिए गंभीर चुनौती बन गया है।

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