गर्मी के मौसम में जल संकट को रोकने के लिए रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने 15 जुलाई 2025 या मानसून के आगमन तक (जो बाद में हो) जिले में बोर खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। यह कदम छत्तीसगढ़ पेयजल अधिनियम 1986 के तहत लिया गया है, जिससे जिले में भूजल स्तर को संरक्षित किया जा सके।
बिना अनुमति नहीं होगा बोर खनन
इस आदेश के अनुसार, बिना सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के कोई भी नया नलकूप (बोरवेल) नहीं खोदा जाएगा, चाहे वह पेयजल या अन्य किसी प्रयोजन के लिए हो।
रायपुर का धरसींवा क्षेत्र भूजल संकट में
केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, धरसींवा विकासखंड का जल स्तर खतरनाक रूप से कम हो गया है और इसे “क्रिटिकल जोन” घोषित किया गया है।
किन अधिकारियों से लेनी होगी अनुमति?
बोर खनन के लिए अनुमति केवल एडीएम रायपुर, एसडीएम रायपुर, आरंग, अभनपुर और तिल्दा द्वारा दी जाएगी। ये अधिकारी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, नगरीय निकाय और तहसील की रिपोर्ट के आधार पर ही स्वीकृति देंगे।
आदेश का उल्लंघन करने पर होगी सख्त कार्रवाई
यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति बोर खनन करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश जल संरक्षण को बढ़ावा देने और भविष्य में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी है।