राहुल गांधी की विदेशी यात्राओं पर सियासत तेज, बीजेपी ने उठाए फंडिंग और पारदर्शिता पर बड़े सवाल

Rahul Gandhi foreign trip:  कांग्रेस सांसद राहुल गांधी एक बार फिर विदेश दौरे पर निकल गए हैं, और उनके रवाना होते ही राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस यात्रा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिनमें सबसे बड़ा मुद्दा इन दौरों की फंडिंग को लेकर है।

22 साल में 54 विदेश दौरे, खर्च पर उठी नई बहस

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि राहुल गांधी ने पिछले 22 वर्षों में 54 बार निजी विदेश यात्राएं की हैं। उनके अनुसार इन यात्राओं पर लगभग 60 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन दौरों में अक्सर 4 से 5 लोग राहुल गांधी के साथ रहते हैं, जिससे खर्च और बढ़ जाता है।

किन देशों तक पहुंचा राहुल का सफर

बीजेपी के मुताबिक राहुल गांधी ने हाल के वर्षों में अमेरिका, इटली, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, वियतनाम, कंबोडिया, सिंगापुर, बहरीन, मालदीव, कतर और यूएई जैसे देशों की यात्राएं की हैं। इसके अलावा 3 मई को मस्कट, ओमान जाने का भी जिक्र किया गया, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आईं।

कमाई बनाम खर्च, आंकड़ों के जरिए उठे सवाल

संबित पात्रा ने राहुल गांधी की आय और खर्च के बीच अंतर को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने चुनावी हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि पिछले 10 असेसमेंट वर्षों में राहुल गांधी की कुल घोषित आय करीब 11 करोड़ रुपये रही है, जबकि विदेश यात्राओं पर खर्च 60 करोड़ रुपये तक बताया जा रहा है।

2015 की यात्रा का उदाहरण बना मुद्दा

बीजेपी ने वर्ष 2015 की एक खास विदेश यात्रा का उदाहरण देते हुए दावा किया कि उस साल राहुल गांधी की घोषित वार्षिक आय लगभग 86.55 लाख रुपये थी, जबकि एक ही विदेश दौरे पर इससे कई गुना ज्यादा खर्च किया गया। इस आधार पर पार्टी ने पूछा कि जब आय सीमित है, तो इतना बड़ा खर्च कौन उठा रहा है।

सुरक्षा और पारदर्शिता से जोड़ा मामला

बीजेपी ने इसे सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बताया है। पार्टी का कहना है कि राहुल गांधी को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनकी विदेश यात्राओं का खर्च कौन वहन करता है।

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