महासमुंद : रमनटोला इलाके में कृषि भूमि की अवैध प्लाटिंग का खुलासा होने के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद एसडीएम अक्षा गुप्ता ने उप पंजीयक कार्यालय को स्पष्ट आदेश जारी करते हुए संबंधित जमीन की बिक्री और रजिस्ट्री पर तत्काल रोक लगा दी है। इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
निवेश क्षेत्र में नियमों की अनदेखी, बिना अनुमति बेचे गए प्लॉट
जारी निर्देशों में साफ कहा गया है कि निवेश सीमा क्षेत्र के भीतर आने वाली कृषि भूमि को छोटे टुकड़ों में बांटकर बेचना नियमों के खिलाफ है। ऐसे मामलों में बिना पूरी जांच के किसी भी तरह का पंजीयन नहीं किया जाएगा।
पटवारी रिपोर्ट में खुलासा: 1.32 हेक्टेयर जमीन को 22 टुकड़ों में बेचा
प्रशासनिक जांच के दौरान हल्का नंबर 42 के अंतर्गत खसरा नंबर 1800/9, 1800/10 और 1800/38 की जमीन की पड़ताल की गई। करीब 1.32 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाली यह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में कृषि के रूप में दर्ज है और चेतना मालू के नाम पर है। जांच में सामने आया कि इस जमीन को बिना किसी वैधानिक अनुमति के 22 छोटे प्लॉट में बांटकर बेच दिया गया।
क्यों अवैध है यह पूरा खेल, समझिए नियमों की सच्चाई
राजस्व अधिकारियों के मुताबिक कृषि भूमि को आवासीय प्लॉट में बदलने के लिए नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से अनुमति लेना जरूरी होता है। बिना डायवर्सन, बिना स्वीकृति और बिना विकास अनुमति के प्लॉटिंग करना पूरी तरह अवैध है। एक ही खसरा नंबर को कई हिस्सों में बांटकर बेचना भी नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
खरीदारों के लिए खतरे की घंटी, भविष्य में हो सकती हैं बड़ी परेशानियां
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि ऐसी अवैध प्लाटिंग से सबसे ज्यादा नुकसान आम खरीदारों को होता है। कई बार न तो जमीन की रजिस्ट्री सही तरीके से हो पाती है और न ही मकान बनाने की अनुमति मिलती है। ऐसे मामलों में लोगों को लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है।
उप पंजीयक को सख्त निर्देश, बिना जांच कोई रजिस्ट्री नहीं
एसडीएम ने उप पंजीयक कार्यालय को निर्देश दिया है कि संबंधित खसरों की जमीन का पूरा परीक्षण किए बिना किसी भी तरह की रजिस्ट्री न की जाए। इस आदेश की जानकारी कलेक्टर, पंजीयन विभाग, तहसील और नगरपालिका समेत सभी संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है, ताकि हर स्तर पर निगरानी मजबूत हो सके।
रियल एस्टेट कारोबार पर उठे सवाल, तेजी से बढ़ रहा अवैध ट्रेंड
स्थानीय जानकारों का कहना है कि महासमुंद जैसे विकसित होते शहरों में अवैध प्लाटिंग का कारोबार तेजी से फैल रहा है। कई लोग बिना नियमों का पालन किए कृषि भूमि को आवासीय बताकर बेच रहे हैं, जिससे सरकार को राजस्व नुकसान और आम जनता को जोखिम उठाना पड़ रहा है।
प्रशासन की कार्रवाई को मिली सराहना, आगे और सख्ती के संकेत
रमनटोला मामले में प्रशासन की त्वरित कार्रवाई को मजबूत कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे जिले में अवैध प्लाटिंग करने वालों पर अंकुश लगेगा और नियमों का पालन सुनिश्चित होगा।
प्लॉट खरीदने से पहले ये बातें जरूर जांच लें
किसी भी जमीन को खरीदने से पहले उसका खसरा रिकॉर्ड जरूर देखें और यह सुनिश्चित करें कि वह कृषि है या आवासीय। संबंधित विभागों से स्वीकृति की जानकारी लें और बिना रजिस्ट्री वाले सौदों से दूर रहें। किसी भी तरह का संदेह होने पर तहसील या पंजीयन कार्यालय से जांच कराना समझदारी भरा कदम होगा।



















