छत्तीसगढ़ में धूमधाम से मना दशहरा, कहीं 50 फीट के रावण का दहन तो कहीं हादसे ने फीकी की खुशियां

 धमतरी/बलरामपुर/बेमेतरा/एमसीबी। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में विजयादशमी का पर्व उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। धमतरी में पहली बार एकलव्य मैदान में 50 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया, जबकि बलरामपुर के रामानुजगंज में भी भव्य आतिशबाजी के बीच रावण दहन हुआ। एमसीबी जिले के चिरमिरी स्थित कोरिया कॉलरी में तालाब के बीच बने टापू पर रावण जलाया गया। वहीं, बेमेतरा जिले में दशहरा देखकर लौट रहे ग्रामीणों से भरा ट्रैक्टर पलट गया। हादसे में 12 लोग घायल हो गए, जिनमें कुछ को गंभीर चोटें आई हैं।

धमतरी में पहली बार एकलव्य मैदान में हुआ रावण दहन

धमतरी में इस बार दशहरा उत्सव के आयोजन स्थल में बदलाव देखने को मिला। नगर निगम की ओर से पहले विंध्यवासिनी मंदिर के पीछे स्थित गौशाला मैदान में रामलीला और रावण दहन कराया जाता था। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा से शहरवासियों की गहरी भावनाएं जुड़ी हुई हैं। हर साल बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ यहां पहुंचकर रामलीला देखते और रावण दहन के साक्षी बनते थे।

इस बार आयोजन स्वर्गीय विष्णु हिरवानी एकलव्य खेल मैदान में किया गया। यहां 50 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन हुआ। स्थान बदलने के बावजूद लोगों का उत्साह बरकरार रहा और हजारों की संख्या में शहरवासी कार्यक्रम में शामिल हुए।

तीन दशक से रामलीला की परंपरा को आगे बढ़ा रही अछोटा की मंडली

धमतरी के दशहरा उत्सव में रामलीला का मंचन भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। अछोटा की भूले-बिसरे रामलीला मंडली करीब 30 वर्षों से इस परंपरा को निरंतर आगे बढ़ा रही है। मंडली के कलाकार भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश मंचन के माध्यम से लोगों तक पहुंचाते हैं।

आधुनिक मनोरंजन के बढ़ते विकल्पों के बीच पारंपरिक रामलीला का लगातार आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का महत्वपूर्ण प्रयास है। स्थानीय कलाकारों की भागीदारी से नई पीढ़ी को भी धार्मिक कथाओं और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है।

महापौर रामू रोहरा ने जताया उत्साह, अगले साल होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम

दशहरा आयोजन के दौरान धमतरी के महापौर रामू रोहरा भी उत्साह में नजर आए। उन्होंने कार्यक्रम को लेकर खुशी जाहिर की और बताया कि इस बार उनका उत्साह इतना अधिक था कि वे खुद आतिशबाजी करने लगे।

महापौर ने अगले वर्ष आयोजन को और व्यापक रूप देने की योजना भी साझा की। उन्होंने कहा कि आने वाले साल से नवरात्र के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इस पहल से धार्मिक उत्सव के साथ शहर की सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

रामानुजगंज में प्रतिमा विसर्जन के बाद हुआ रावण दहन

बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में विजयादशमी पर धार्मिक उत्साह के बीच रावण दहन का आयोजन किया गया। शारदीय नवरात्र के समापन पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं को विदाई देने के बाद आतिशबाजी के साथ रावण के पुतलों का दहन किया गया।

शहर में हाई स्कूल मैदान और कन्हर नदी के तटवर्ती क्षेत्र में रावण दहन की तैयारियां की गई थीं। प्रतिमा विसर्जन के बाद निर्धारित स्थलों पर आयोजन संपन्न हुआ। इस दौरान शहर के साथ आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। आतिशबाजी और रावण दहन देखने के लिए दोनों स्थानों पर लोगों की भीड़ जुटी रही।

एमसीबी में तालाब के बीच बने टापू पर जलाया जाता है रावण

एमसीबी जिले के चिरमिरी स्थित कोरिया कॉलरी में दशहरा उत्सव की एक खास परंपरा देखने को मिलती है। यहां तालाब के बीच बने ऊंचे टापूनुमा स्थान पर रावण का पुतला स्थापित किया जाता है और फिर उसका दहन किया जाता है।

इस अनोखे दृश्य को देखने के लिए दूर-दराज के इलाकों से भी लोग पहुंचते हैं। करीब 50 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा ने यहां के दशहरा उत्सव को विशिष्ट पहचान दी है। तालाब के बीच ऊंचाई पर स्थापित रावण के पुतले का दहन लोगों के लिए खास आकर्षण बना रहता है।

बेमेतरा में दशहरा देखकर लौट रहे ग्रामीणों का ट्रैक्टर पलटा, 12 घायल

बेमेतरा जिले में दशहरा उत्सव से लौट रहे ग्रामीणों के लिए घर वापसी का सफर हादसे में बदल गया। नवागढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम साल्हेघोरी में दशहरा देखकर लौट रहे लोगों से भरा ट्रैक्टर अचानक पलट गया। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ट्रैक्टर में करीब 40 लोग सवार थे। दुर्घटना में 12 लोग घायल हुए, जिनमें कुछ को गंभीर चोटें आई हैं। सभी घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

घटना के बाद अस्पताल में उपचार की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि नवागढ़ अस्पताल में कुछ घायलों को जमीन पर लिटाकर इलाज किया गया। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।

खुशियों के पर्व पर सुरक्षा और बेहतर व्यवस्थाओं की जरूरत

छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में दशहरा उत्सव ने धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और पारंपरिक आयोजनों की जीवंत तस्वीर पेश की। कहीं रामलीला और रावण दहन ने लोगों को आकर्षित किया, तो कहीं वर्षों पुरानी परंपराओं ने उत्सव को खास बनाया। लेकिन बेमेतरा में हुआ हादसा सार्वजनिक आयोजनों के दौरान सुरक्षित परिवहन और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की अहमियत भी सामने लाता है। ऐसे आयोजनों में लोगों की सुरक्षित आवाजाही और समय पर उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *