यूपी विधानसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे पर मंथन, परंपरागत सीटें छोड़ने को तैयार नहीं अखिलेश यादव

 लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। भारतीय जनता पार्टी जहां सत्ता में वापसी के लिए चुनावी तैयारियों में जुटी है, वहीं लंबे समय से सत्ता से बाहर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस भी गठबंधन के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती हैं। अखिलेश यादव और राहुल गांधी के साथ आने की संभावनाओं के बीच अब दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि सपा और कांग्रेस कितनी-कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेंगी।

परंपरागत सीटों पर सपा का दावा बरकरार

सीट बंटवारे को लेकर समाजवादी पार्टी अपनी परंपरागत सीटों पर समझौता करने के पक्ष में नहीं दिख रही है। पार्टी उन क्षेत्रों को अपने पास रखना चाहती है, जहां उसके उम्मीदवार लगातार जीतते रहे हैं और उसका मजबूत जनाधार है।इसके अलावा सपा उन सीटों पर भी अपना दावा बनाए रखना चाहती है, जहां पिछले चुनाव में उसके प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन पार्टी का मानना है कि वहां उसकी स्थिति मजबूत रही। ऐसे में गठबंधन के दौरान इन सीटों का बंटवारा दोनों दलों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बन सकता है।

कांग्रेस भी मजबूत सीटों पर नहीं छोड़ना चाहती दावा

दूसरी ओर कांग्रेस भी उन विधानसभा क्षेत्रों पर अपनी दावेदारी बनाए रखना चाहती है, जहां पार्टी का संगठन और चुनावी आधार मजबूत है। दोनों दलों के सामने ऐसी सीटों की पहचान करने की चुनौती है, जहां गठबंधन के उम्मीदवार की जीत की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सहमति बनाई जा सके।सीटों की संख्या के साथ-साथ उम्मीदवारों के चयन और क्षेत्रीय समीकरणों पर भी बातचीत अहम होगी। संभावना जताई जा रही है कि सपा और कांग्रेस के नेता दिल्ली में बैठक कर सीट बंटवारे के मुद्दे पर चर्चा कर सकते हैं। हालांकि, बैठक की तारीख और अंतिम फॉर्मूले को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

लोकसभा चुनाव के नतीजों से गठबंधन को मिली उम्मीद

सपा और कांग्रेस ने पिछले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में मिलकर चुनाव लड़ा था। दोनों दलों के प्रदर्शन ने गठबंधन को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए नई उम्मीद दी है। लोकसभा चुनाव के परिणामों में उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को कड़ी चुनौती दी थी।इसी प्रदर्शन के आधार पर दोनों दल विधानसभा चुनाव में भी साझा रणनीति के जरिए बेहतर परिणाम हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, लोकसभा और विधानसभा चुनाव के मुद्दों, उम्मीदवारों तथा क्षेत्रीय समीकरणों में अंतर होने के कारण पिछले परिणामों को भविष्य की सफलता की गारंटी नहीं माना जा सकता।

सीटों के फॉर्मूले पर सहमति बनाना होगी बड़ी चुनौती

सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की चर्चा के साथ सबसे बड़ा सवाल सीटों के बंटवारे का है। दोनों दल अपनी मजबूत सीटों पर दावा कर रहे हैं, ऐसे में आपसी सहमति बनाना आसान नहीं होगा। सपा अपने पारंपरिक जनाधार वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता देना चाहेगी, जबकि कांग्रेस अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में अधिक प्रतिनिधित्व की मांग कर सकती है।अब निगाहें दोनों दलों के बीच होने वाली संभावित बैठक और उसमें निकलने वाले फैसले पर टिकी हैं। सीट बंटवारे का अंतिम फॉर्मूला सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस किस रणनीति के तहत मैदान में उतरेंगी।

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