हाईकोर्ट के आदेश का 9 महीने तक नहीं हुआ पालन, आबकारी कमिश्नर समेत दो अधिकारियों को अवमानना का नोटिस

 बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग से जुड़े एक पदोन्नति मामले में हाईकोर्ट के आदेश का समय पर पालन नहीं करना अधिकारियों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। प्रधान आरक्षक मुकेश कुमार शर्मा की आबकारी उप निरीक्षक पद पर पदोन्नति से संबंधित मामले में हाईकोर्ट ने उनके प्रकरण पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया था। इसके लिए 90 दिनों की समय सीमा तय की गई थी, लेकिन करीब नौ महीने बीत जाने के बाद भी आदेश का पालन नहीं किया गया।मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने आबकारी कमिश्नर पी.एस. एल्मा और अपर आबकारी आयुक्त रायपुर पी.एल. साहू को नोटिस जारी किया है। अदालत ने दोनों अधिकारियों से जवाब मांगा है कि हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना के लिए उनके खिलाफ न्यायालय अवमानना अधिनियम 1971 के तहत कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।

पदोन्नति परीक्षा में कम अंक मिलने के बाद हाईकोर्ट पहुंचे थे मुकेश शर्मा

यह मामला बिलासपुर के महर्षि स्कूल रोड निवासी मुकेश कुमार शर्मा से जुड़ा है। वे जांजगीर-चांपा जिले में आबकारी विभाग के प्रधान आरक्षक के रूप में पदस्थ हैं। आबकारी उप निरीक्षक पद के लिए आयोजित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा में उनके सर्विस रिकॉर्ड यानी एसीआर के आधार पर 15 अंक कम कर दिए गए थे। इसके चलते वे परीक्षा में सफल नहीं हो सके।इसी निर्णय से असंतुष्ट होकर मुकेश कुमार शर्मा ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय के माध्यम से बिलासपुर हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी।

पुराने एसीआर में प्रतिकूल टिप्पणी को लेकर उठे थे सवाल

याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने यह तथ्य रखा गया कि वर्ष 2017, 2018 और 2019 के सर्विस रिकॉर्ड में प्रतिकूल टिप्पणियां दर्ज की गई थीं। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि इन प्रतिकूल टिप्पणियों से पहले उन्हें कारण बताओ नोटिस देकर अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया।हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न न्याय दृष्टांतों का हवाला देते हुए इस पहलू को महत्वपूर्ण माना। अदालत ने निर्देश दिया कि अन्य एसीआर के आधार पर याचिकाकर्ता के मामले पर दोबारा विचार किया जाए। इसके लिए 90 दिन की समय सीमा निर्धारित की गई थी।

आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो दायर हुई अवमानना याचिका

हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद तय अवधि में मामले पर दोबारा विचार नहीं किया गया। दिसंबर 2025 में जारी आदेश के करीब नौ महीने बाद भी जब आदेश का पालन नहीं हुआ तो मुकेश कुमार शर्मा ने फिर हाईकोर्ट का रुख किया।इस बार उन्होंने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय के माध्यम से अवमानना याचिका दाखिल की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि अधिकारियों ने अदालत के स्पष्ट निर्देश के बावजूद निर्धारित समय सीमा में कोई कार्रवाई नहीं की।

अदालत ने जताई नाराजगी, अधिकारियों से मांगा जवाब

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आदेश के पालन में हुई देरी को गंभीरता से लिया। अदालत ने आबकारी कमिश्नर पी.एस. एल्मा और अपर आबकारी आयुक्त पी.एल. साहू को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।नोटिस में पूछा गया है कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने के मामले में दोनों अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय अवमानना अधिनियम 1971 के तहत कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। अब अधिकारियों के जवाब के बाद मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।

अदालती आदेशों का पालन नहीं होने पर बढ़ता है न्यायिक बोझ

याचिकाकर्ता की ओर से सुनवाई के दौरान यह भी तर्क दिया गया कि हाईकोर्ट के आदेशों का समय पर पालन नहीं होने से अवमानना याचिकाओं की संख्या बढ़ती है। इससे अदालत का महत्वपूर्ण समय ऐसे मामलों की सुनवाई में खर्च होता है और दूसरे लंबित मामलों पर सुनवाई प्रभावित हो सकती है।इसी पहलू को देखते हुए मामले में अदालत की नाराजगी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब दोनों आबकारी अधिकारियों को नोटिस का जवाब देना होगा और उनके स्पष्टीकरण के आधार पर हाईकोर्ट आगे का निर्णय लेगा।

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