पहाड़ी कोरवा आश्रम में बदहाली का आलम, 3 दिन से बिजली गुल और 2 साल से खराब हैंडपंप…एक किमी दूर से पानी ला रहे बच्चे

 सरगुजा : मैनपाट क्षेत्र में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा बच्चों के लिए संचालित आश्रम में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मामला सामने आया है। बरिमा पंचायत स्थित इस आश्रम में पिछले तीन दिनों से बिजली नहीं है। बिजली बंद होने के कारण पानी का मोटर भी काम नहीं कर रहा है और आश्रम की पानी की टंकी नहीं भर पा रही है।स्थिति यह है कि बच्चों को पीने के पानी के लिए रोजाना करीब एक किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। बच्चे खुद बर्तन और डिब्बों में पानी भरकर आश्रम तक ला रहे हैं। पर्याप्त पानी नहीं मिलने से नहाने और रोजमर्रा के दूसरे कामों में भी उन्हें परेशानी हो रही है।

दो साल से खराब पड़ा है आश्रम का इकलौता हैंडपंप

आश्रम परिसर में पानी की व्यवस्था के लिए लगा इकलौता हैंडपंप भी लंबे समय से बंद है। बताया गया है कि यह हैंडपंप करीब दो साल से खराब पड़ा है। ऐसे में बिजली गुल होने के बाद बच्चों के सामने पानी का संकट और गहरा गया है।आश्रम प्रबंधन के मुताबिक, हैंडपंप से पहले लाल रंग का पानी निकलता था, जिसे पीने योग्य नहीं माना जाता था। बाद में हैंडपंप पूरी तरह खराब हो गया। इसकी जानकारी विभाग को कई बार दिए जाने के बावजूद अब तक इसे दुरुस्त नहीं कराया गया है।

बिजली नहीं होने से पानी की सप्लाई भी ठप

आश्रम की अधीक्षिका के अनुसार मैनपाट क्षेत्र में पिछले तीन से चार दिनों से बिजली आपूर्ति प्रभावित है। बिजली नहीं होने के कारण पानी का मोटर नहीं चल पा रहा है और टंकी तक पानी नहीं पहुंच रहा है।इसी वजह से बच्चों को पानी जुटाने के लिए आश्रम से बाहर जाना पड़ रहा है। पानी की इस समस्या का सीधा असर बच्चों की दैनिक दिनचर्या पर पड़ रहा है।

सोलर सिस्टम लगा, लेकिन मोटर नहीं चलती

आश्रम में बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए सोलर सिस्टम भी लगाया गया है। हालांकि, इससे पानी का मोटर संचालित नहीं हो पा रहा है। बरसात के मौसम में मैनपाट में कई दिनों तक बादल छाए रहने से सोलर सिस्टम की क्षमता भी प्रभावित होती है।ऐसे में बिजली कटौती के दौरान आश्रम में पानी और रोशनी दोनों की समस्या खड़ी हो जाती है। रात के समय कई बार पूरा परिसर अंधेरे में डूब जाता है।

पढ़ाई भी हो रही प्रभावित

बिजली की समस्या का असर आश्रम में रहने वाले बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। रात में पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण बच्चे ठीक से पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। दूसरी ओर पानी की व्यवस्था के लिए उन्हें रोजाना करीब एक किलोमीटर तक जाना पड़ रहा है।विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों के लिए संचालित इस आश्रम में बुनियादी सुविधाओं की यह स्थिति विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग पानी, बिजली और हैंडपंप की समस्या को दूर करने के लिए कब तक ठोस कदम उठाता है।

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