CG Constable Recruitment: 2017 की 2259 पदों वाली भर्ती में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, 400 से ज्यादा अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ

 CG Constable Recruitment:  छत्तीसगढ़ में साल 2017 की पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका यानी SLP खारिज कर दी है। इसके बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश को लागू करने का रास्ता खुल गया है, जिसमें वैध प्रतीक्षा सूची से रिक्त पदों को भरने की बात कही गई थी। इस फैसले से लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे 400 से अधिक अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

2259 पदों की भर्ती से जुड़ा है पूरा मामला

मामला साल 2017 में जारी 2,259 पुलिस कॉन्स्टेबल पदों की भर्ती प्रक्रिया से संबंधित है। भर्ती के बाद रिक्त पदों को प्रतीक्षा सूची से भरने को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। इसी मुद्दे पर पारस राम ध्रुव और अन्य अभ्यर्थियों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का रुख किया था।हाईकोर्ट ने 1 फरवरी 2024 को अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पुलिस कॉन्स्टेबल सेवा नियम 2007 के नियम 13(2) का उल्लेख किया था। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, प्रोन्नति, सेवानिवृत्ति, कैडर परिवर्तन या अन्य कारणों से खाली हुए पदों को वैध प्रतीक्षा सूची के जरिए भरा जाना था।

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती

हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और SLP दाखिल की। सरकार की याचिका लंबित रहने के दौरान नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों का मामला भी अदालत के समक्ष बना रहा।अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा SLP खारिज किए जाने के बाद हाईकोर्ट के आदेश के क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट हुई है। इसके चलते प्रतीक्षा सूची में शामिल पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।

47 अभ्यर्थियों के पद सुरक्षित रखने का भी हुआ था आदेश

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को 47 सफल अभ्यर्थियों के पद सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था। अब SLP खारिज होने के बाद प्रतीक्षा सूची में शामिल अन्य अभ्यर्थियों के लिए भी नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना बनी है।

सालों से नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थी

2017 की भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद प्रतीक्षा सूची से रिक्त पदों को भरने के मुद्दे पर कानूनी विवाद के कारण कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति अटकी हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद इस विवाद में एक अहम कानूनी पड़ाव पूरा हो गया है।अब राज्य सरकार और संबंधित विभाग की ओर से हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। नियुक्ति की वास्तविक संख्या और प्रक्रिया की समयसीमा विभागीय कार्रवाई के बाद स्पष्ट होगी।

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