सोने : अमेरिकी ट्रेजरी के एक अहम कदम ने अंतरराष्ट्रीय सर्राफा बाजार में हलचल तेज कर दी है। बढ़ती उधारी लागत को नियंत्रित करने के लिए लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की बायबैक बढ़ाने के फैसले के बाद निवेशकों का रुझान एक बार फिर सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ा। इसका सीधा फायदा सोने और चांदी को मिला।ब्लूमबर्ग के अनुसार न्यूयॉर्क में स्पॉट गोल्ड 2.2 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,614.63 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। वहीं चांदी भी करीब 2 प्रतिशत चढ़कर 69.46 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार करती दिखी। शुक्रवार को सोना मई के मध्य के बाद अपने ऊंचे स्तर पर पहुंच गया और पूरे सप्ताह में करीब 5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करने की स्थिति में रहा।
ट्रेजरी के फैसले ने क्यों बढ़ाई निवेशकों की चिंता
अमेरिकी सरकार ने महंगे कर्ज की समस्या से निपटने के लिए लंबी अवधि के बॉन्ड की बायबैक बढ़ाने का कदम उठाया। इस फैसले के बाद निवेशकों के बीच अमेरिकी वित्तीय स्थिति और बढ़ते कर्ज को लेकर पुरानी चिंताएं फिर उभर आईं।सरकारी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में गिरावट आने से सोने की चमक और बढ़ गई। निवेशकों को आशंका है कि अमेरिकी नीतियों का असर डॉलर की मजबूती और उस पर भरोसे पर पड़ सकता है। ऐसे माहौल में सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में फायदा मिलता है।
रिकॉर्ड स्तर से अभी भी नीचे है सोना
हालिया तेजी के बावजूद सोना अभी अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से कुछ दूरी पर है। साल की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद इसकी कीमतों में गिरावट और उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। मौजूदा भाव जनवरी के आखिर में बने शिखर से करीब 100 डॉलर प्रति औंस नीचे बताए जा रहे हैं।हालांकि, पिछले कुछ दिनों की तेजी ने यह संकेत जरूर दिया है कि वैश्विक वित्तीय अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक फिर से सोने की ओर रुख कर सकते हैं।
कमजोर डॉलर ने कीमती धातुओं को दिया सहारा
शुक्रवार को डॉलर इंडेक्स तीन महीने के निचले स्तर के आसपास पहुंच गया। सप्ताह की शुरुआत से ही डॉलर पर दबाव देखा जा रहा था। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी संकेत दिया कि सरकार महंगे कर्ज से निपटने के लिए बॉन्ड बायबैक का दायरा और बढ़ा सकती है तथा जल्द ही उधारी लागत से जुड़ी नई वित्तीय पहल सामने आ सकती है।डॉलर में कमजोरी आमतौर पर सोने जैसी कीमती धातुओं के लिए सहारा बनती है, क्योंकि अन्य मुद्राओं में खरीदारी करने वाले निवेशकों के लिए यह अपेक्षाकृत आकर्षक हो जाता है।
2025 में तेजी के पीछे क्या थी बड़ी वजह
पिछले साल सोने की जोरदार तेजी के पीछे वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ता कर्ज और मुद्राओं की कमजोरी को लेकर चिंता प्रमुख कारणों में रही। निवेशकों के बीच यह धारणा मजबूत हुई कि भारी कर्ज वाले देश वित्तीय दबाव से निकलने के लिए मुद्रास्फीति और कमजोर मुद्रा का रास्ता अपना सकते हैं।इस सोच ने सोने और अन्य कीमती धातुओं को सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में मजबूत किया और 2025 में सोने की कीमतों में करीब 65 प्रतिशत की उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली।
ईटीएफ में बदला निवेशकों का रुख
कुछ समय तक सोने से जुड़े ईटीएफ से लगातार निकासी देखने को मिल रही थी, लेकिन अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है। ब्लूमबर्ग द्वारा ट्रैक किए गए फंड्स ने गुरुवार को करीब 18 टन सोने की खरीदारी की, जो सितंबर 2025 के बाद एक दिन में सबसे बड़ी खरीद में शामिल रही।लगातार पांचवें सप्ताह इन फंड्स में निवेश बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, सोने की आगे की चाल पर ऊर्जा कीमतों का असर पड़ सकता है। तेल महंगा रहने से मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ सकता है और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में सोने की कीमतों की दिशा डॉलर, बॉन्ड यील्ड, महंगाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।



















