करोड़ों की चमक दिखाकर बिछाया ऐसा जाल, पुलिस पहुंची तो खुल गई ठगी के पूरे नेटवर्क की परतें

 रायपुर : पुलिस ने रकम दोगुनी करने और नकली करेंसी को केमिकल के जरिए असली नोट में बदलने का झांसा देकर लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और थाना तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए पुणे के खंडाला स्थित एक रिसॉर्ट से सात आरोपियों को गिरफ्तार किया।पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 4 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी, 17 मोबाइल फोन, नोट के आकार के काले कागज, कांच की प्लेटें, दस्तावेज और अन्य सामान बरामद किया है। इस मामले में पहले नागपुर से दो महिला आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इस तरह अब तक कुल नौ आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं।

रायपुर में 1.13 करोड़ की ठगी से जुड़ा मामला

पुलिस के अनुसार, गिरोह ने रायपुर के एक व्यक्ति को 1.13 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाया था। इसी मामले की जांच आगे बढ़ने पर गिरोह के दूसरे सदस्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई।गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, चैट, संपर्क नंबर और सोशल मीडिया गतिविधियों की तकनीकी जांच की गई। इसी आधार पर पुलिस को उनके पुणे में सक्रिय होने की जानकारी मिली। इसके बाद टीम ने करीब एक सप्ताह तक उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखी।पुलिस को पता चला कि गिरोह के सदस्य खंडाला के एक रिसॉर्ट में एक व्यक्ति को रकम दोगुनी करने का लालच देकर बुला रहे हैं। सूचना के आधार पर टीम ने वहां दबिश दी और कथित तौर पर ठगी की तैयारी कर रहे सात आरोपियों को मौके से पकड़ लिया।

नकली नोट को असली बनाने का दिखाया जाता था झांसा

गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित बताया जा रहा है। आरोपी खुद को प्रभावशाली लोगों, विदेशी निवेशकों और बड़े कारोबारी नेटवर्क से जुड़ा बताकर संभावित पीड़ितों का भरोसा हासिल करते थे। इसके बाद विदेशी फंड, निवेश, तकनीक या विशेष केमिकल के नाम पर बड़ी रकम लगाने का प्रस्ताव दिया जाता था।वॉश एंड वॉश ब्लैक करेंसी स्कैम में काले कागज या नकली नोटों को विशेष रसायन से असली भारतीय मुद्रा में बदलने का नाटक किया जाता था। पुलिस के मुताबिक, इसके लिए पहले से तैयार असली नोटों का इस्तेमाल कर पीड़ित के सामने पूरी प्रक्रिया को वास्तविक साबित करने की कोशिश की जाती थी।भरोसा कायम होने के बाद पीड़ित से लगातार अलग-अलग मदों के नाम पर रकम ली जाती थी। कभी निवेश बढ़ाने तो कभी प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर पैसे वसूले जाते थे।

देश के कई शहरों में फैला था नेटवर्क

पूछताछ में पुलिस को पता चला कि गिरोह के सदस्य कथित तौर पर वर्ष 2005 से ठगी की गतिविधियों में सक्रिय हैं। जांच में देशभर में 100 से अधिक लोगों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आने की बात पुलिस ने कही है।गिरोह की गतिविधियों के तार छत्तीसगढ़ के अलावा नोएडा, पुणे, वडोदरा, उदयपुर, दिल्ली और कई अन्य शहरों से जुड़े बताए जा रहे हैं। आरोपियों द्वारा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, राजस्थान और गुजरात जैसे स्थानों के महंगे होटलों में संभावित पीड़ितों से मुलाकात करने की जानकारी भी सामने आई है।पुलिस के अनुसार, प्रभाव जमाने के लिए गिरोह के कुछ सदस्य निजी सुरक्षाकर्मियों और गनमैन के साथ भी दिखाई देते थे। इससे सामने वाले व्यक्ति पर उनकी कथित आर्थिक और सामाजिक पहुंच का प्रभाव पड़ता था।

तीन आरोपियों को बताया जा रहा मुख्य संचालक

जांच में ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन, शेट्टी या रेड्डी और मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर के नाम प्रमुखता से सामने आए हैं।पुलिस के मुताबिक, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव पहले मुंबई में ठगी के एक मामले में जेल जा चुका है। वहीं मनोज कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ मुंबई और वाराणसी में भी ठगी के मामले सामने आ चुके हैं और वह पूर्व में जेल में रह चुका है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

  1. ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, उम्र 46 वर्ष, निवासी गुड़गांव, हरियाणा, वर्तमान पता नालासोपारा, मुंबई।
  2. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन, शेट्टी और रेड्डी, उम्र 52 वर्ष, निवासी पाण्डेयपुर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश।
  3. मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर, उम्र 55 वर्ष, निवासी शिवपुर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश।
  4. विवेक सिंह, उम्र 48 वर्ष, निवासी लहौरा वीर जगतगंज, वाराणसी, उत्तर प्रदेश।
  5. शुभम पांडेय, उम्र 37 वर्ष, निवासी चंदवत, जौनपुर, उत्तर प्रदेश, वर्तमान पता गोरेगांव ईस्ट, मुंबई।
  6. योगेन्द्र चौहान, उम्र 48 वर्ष, निवासी सेनापुर, केराकत, जौनपुर, उत्तर प्रदेश।
  7. बालमुकुंद दीक्षित, उम्र 40 वर्ष, निवासी खटारा, केराकत, जौनपुर, उत्तर प्रदेश।

बीएनएस की धाराओं में मामला दर्ज

पुलिस ने थाना तेलीबांधा में अपराध क्रमांक 330/26 दर्ज किया है। आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4) और 61(2) के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और देश के अलग-अलग हिस्सों में की गई कथित ठगी की घटनाओं की जानकारी जुटा रही है।जांच का दायरा बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों और आर्थिक लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।

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