45 डॉक्टरों के प्रमोशन के बाद बदली तस्वीर, पुराने मेडिकल कॉलेजों की PG सीटों पर मंडराया खतरा तो सरकार को लेना पड़ा बड़ा फैसला

 छत्तीसगढ़ : मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसरों की पदस्थापना को लेकर चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अपने पुराने आदेश में बदलाव किया है। करीब डेढ़ महीने पहले किए गए प्रमोशन के बाद 12 प्रोफेसरों की पोस्टिंग अब संशोधित कर दी गई है। विभाग ने 11 अगस्त को नया आदेश जारी किया, जिसमें कुछ डॉक्टरों को उनकी पहले तय की गई जगह से अलग संस्थानों में पदस्थ किया गया है।यह बदलाव केवल प्रशासनिक स्तर का फेरबदल नहीं है। इसके पीछे पुराने मेडिकल कॉलेजों में चल रही PG पढ़ाई और सीटों की मान्यता से जुड़ी अहम चिंता भी बताई जा रही है।

25 जून के आदेश के बाद क्यों पैदा हुई नई उलझन

चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 25 जून को मेडिकल कॉलेजों में करीब 45 डॉक्टरों का प्रमोशन किया था। इसके बाद प्रमोशन पाने वाले प्रोफेसरों को अलग-अलग नए मेडिकल कॉलेजों में पदस्थ किया गया।इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य नए मेडिकल कॉलेजों में खाली पदों को भरना और संस्थानों को आवश्यक मान्यता दिलाने की दिशा में आगे बढ़ना था। लेकिन पोस्टिंग के बाद अधिकारियों के सामने एक अलग समस्या सामने आई।पुराने मेडिकल कॉलेजों से अनुभवी प्रोफेसरों को हटाने पर वहां पहले से संचालित PG पाठ्यक्रमों और सीटों की मान्यता प्रभावित होने की आशंका सामने आई। इसके बाद विभाग ने सभी पहलुओं की समीक्षा की।

रायपुर में तीन PG सीटों पर आ गया था संकट

रायपुर के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग का मामला इस बदलाव की सबसे अहम वजहों में शामिल रहा। यहां एक प्रोफेसर की मौजूदगी में तीन PG सीटें संचालित हो रही हैं।यदि संबंधित प्रोफेसर को दूसरी जगह भेज दिया जाता, तो विभाग में प्रोफेसर का पद खाली हो जाता। ऐसी स्थिति में वहां चल रही तीनों PG सीटों के संचालन और मान्यता पर सवाल खड़े हो सकते थे।इसी तरह बिलासपुर के फिजियोलॉजी विभाग में भी प्रोफेसर के स्थानांतरण के बाद पद खाली होने की स्थिति बन रही थी। इससे वहां की PG शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई।

अब इन 12 प्रोफेसरों की पोस्टिंग में किया गया बदलाव

संशोधित आदेश के तहत 12 प्रोफेसरों की पदस्थापना में परिवर्तन किया गया है। इनमें डॉ. स्निग्धा जैन बंसल, रायपुर, डॉ. मनीष पाटिल, दुर्ग, डॉ. नितिन वले, दुर्ग, डॉ. शशिकला कोसम, कबीरधाम, डॉ. राजीव रतन जैन, रायपुर के 100 बिस्तर कैंसर संस्थान, डॉ. नरेन्द्र नरसिंह, महासमुंद और डॉ. विशाल कलकर्णी, कांकेर शामिल हैं।इसके अलावा डॉ. केशव कश्यप, बिलासपुर, डॉ. चंद्रपाल भगत, दुर्ग, डॉ. अजय हलवाई, दुर्ग, डॉ. राजेन्द्र रात्रे, महासमुंद और डॉ. विवेक शर्मा, दुर्ग की पोस्टिंग में भी संशोधन किया गया है।

नए मेडिकल कॉलेजों और पुराने संस्थानों के बीच संतुलन की कोशिश

विभाग के सामने एक तरफ नए मेडिकल कॉलेजों में खाली पदों को भरने की जरूरत है, तो दूसरी तरफ पुराने संस्थानों में PG पाठ्यक्रमों को सुचारु रखना भी जरूरी है।इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए पोस्टिंग की दोबारा समीक्षा की गई। विभाग का प्रयास है कि नए मेडिकल कॉलेजों को जरूरी प्रोफेसर मिलें, लेकिन इसके लिए पुराने मेडिकल कॉलेजों में ऐसी स्थिति न बने जिससे PG सीटों की मान्यता या संचालन पर असर पड़े।

अब आगे किस बात पर रहेगी नजर

संशोधित पोस्टिंग के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए मेडिकल कॉलेजों में रिक्त पद भरने की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है। साथ ही पुराने संस्थानों में PG सीटों के लिए आवश्यक प्रोफेसर और अन्य शैक्षणिक मानक भी बने रहें, इस पर विभाग को लगातार निगरानी रखनी होगी।इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि मेडिकल कॉलेजों में सिर्फ पद भरना पर्याप्त नहीं है। प्रोफेसरों की उपलब्धता का सीधा संबंध PG शिक्षा, सीटों की मान्यता और चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़ा हुआ है।

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