रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रथम लोकपर्व हरेली तिहार के अवसर पर कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि हरेली केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, किसानों, प्रकृति और लोक जीवन से जुड़ी आस्था और गौरव का प्रतीक है।
हरेली हमें कृषि संस्कृति और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देती है
मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि कृषि प्रधान राज्य होने के कारण हरेली का छत्तीसगढ़ में विशेष महत्व है। इस दिन किसान अपने हल, नांगर और अन्य कृषि उपकरणों की पूजा कर अच्छी फसल और खुशहाली की कामना करते हैं। यह पर्व हमें अन्नदाता किसानों के योगदान का सम्मान करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने की प्रेरणा भी देता है।
किसानों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले, खेती अधिक लाभकारी बने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो, इसके लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार की किसान हितैषी योजनाओं का लाभ प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। उनका कहना था कि मजबूत किसान ही आत्मनिर्भर गांव और समृद्ध छत्तीसगढ़ की आधारशिला हैं।
युवाओं को कौशल से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कृषि के साथ-साथ युवाओं के भविष्य को भी प्राथमिकता दे रही है। कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि युवा आधुनिक तकनीक और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें। सरकार का लक्ष्य युवाओं को केवल नौकरी पाने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाना है।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जुड़ने की अपील
गुरु खुशवंत साहेब ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का उल्लेख करते हुए प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हरेली का मूल संदेश हरियाली और प्रकृति संरक्षण है। इसलिए इस अवसर पर हर व्यक्ति एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प ले, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, सुरक्षित और हराभरा छत्तीसगढ़ मिल सके।



















