बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सामने आए चर्चित फर्जी सर्पदंश मुआवजा मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में गिरफ्तार किए गए तीन सरकारी कर्मचारियों को कलेक्टर संजय अग्रवाल ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। पुलिस जांच में इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कई नए तथ्य सामने आ रहे हैं। वहीं अभी 8 कर्मचारियों के बयान दर्ज होना बाकी हैं।
गिरफ्तार तीन कर्मचारियों पर गिरी निलंबन की गाज
मामले में गिरफ्तार तहसील कार्यालय के कर्मचारी नरेंद्र कुमार कौशिक, हरीश राठौर और गरीब दास बिंझवार को निलंबित कर दिया गया है। तीनों के खिलाफ पहले ही पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी थी।बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के बाद छत्तीसगढ़ प्रदेश राजस्व लिपिक संघ और छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने कर्मचारियों के पक्ष में आवाज उठाई थी। संघ ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था। साथ ही मांगें पूरी नहीं होने पर सामूहिक अवकाश की चेतावनी भी दी थी।
अब तक कई आरोपी पहुंच चुके हैं जेल
फर्जी सर्पदंश मुआवजा मामले में पुलिस अब तक कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। तहसील कार्यालय के कर्मचारी गरीब बिंझवार, नरेंद्र कौशिक और हरीश राठौर को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।इससे पहले डॉक्टर प्रियंका सोनी, गोविंद विश्वकर्मा और वकील हीराप्रसाद खांडेकर समेत अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई हो चुकी है। पुलिस के अनुसार अभी 8 अन्य कर्मचारियों से पूछताछ और बयान दर्ज किए जाने बाकी हैं।
दो शवों की फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने का आरोप
पुलिस जांच में सामने आया है कि महमंद निवासी निसार खान और लता सूर्यवंशी की मौत के मामलों में कथित तौर पर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की गई थी। आरोप है कि तत्कालीन सिम्स डॉक्टर प्रियंका सोनी ने दोनों मामलों में मौत का कारण सर्पदंश बताया, जबकि जांच में रिपोर्ट को संदिग्ध माना गया।इसी आधार पर पुलिस ने 18 जुलाई को डॉक्टर प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
मुआवजा दिलाने वाले नेटवर्क की हो रही जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे मामले में मृतकों के परिजन, वकील और कुछ सरकारी कर्मचारियों के बीच मिलीभगत की आशंका है। निसार खान की पत्नी सफीना बानो, लता सूर्यवंशी के पति संतोष सूर्यवंशी और वकील रंजीत कुमार चतुर्वेदी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।वहीं, इस नेटवर्क का मुख्य आरोपी बताए जा रहे वकील श्रवण वस्त्रकार की तलाश जारी है। पुलिस के मुताबिक वह लंबे समय से बीमारी का इलाज करा रहा है।
15 संदिग्ध मामलों की जांच, कई डॉक्टरों पर कार्रवाई की संभावना
पुलिस अब तक फर्जी सर्पदंश दिखाकर मुआवजा लेने के 15 मामलों की जांच कर रही है। जांच में 4 से 5 अन्य डॉक्टरों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी संदिग्ध पाई गई हैं।अधिकारियों का कहना है कि सभी मामलों की समीक्षा की जा रही है और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
बिलासपुर जिले में फर्जी सर्पदंश रिपोर्ट का मामला पहली बार सामने नहीं आया है। साल 2025 में बिल्हा थाना क्षेत्र में जहरीला पदार्थ खाने से हुई मौत को सर्पदंश बताकर मुआवजा लेने की कोशिश का मामला सामने आया था। उस मामले में भी डॉक्टर, मृतक के परिजन और एक वकील के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है और जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।



















