नाबालिग से लैंगिक उत्पीड़न मामले में पूर्व फूड इंस्पेक्टर और सहयोगी को 5-5 साल की सजा, कोर्ट ने जांच के भी दिए आदेश

बलरामपुर: बलरामपुर-रामानुजगंज जिले की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो) ने नाबालिग बालिका से लैंगिक उत्पीड़न के मामले में तत्कालीन फूड इंस्पेक्टर और उसके सहयोगी को दोषी करार देते हुए दोनों को पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोनों पर अर्थदंड भी लगाया है। इसके साथ ही नाबालिग को कथित रूप से अवैध तरीके से नौकरी पर रखने और राशन कार्ड से जुड़े मामलों में संभावित अनियमितताओं की जांच के निर्देश भी दिए गए हैं।

नौकरी का झांसा देकर उत्पीड़न का आरोप

अभियोजन के अनुसार वर्ष 2022 में पीड़िता की मां ने रामानुजगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि तत्कालीन फूड इंस्पेक्टर निखिलेश टेम्भुर्ने ने नाबालिग बालिका को कार्यालय में काम पर रखा और बाद में कार्यालयी काम का हवाला देकर उसे अपने घर बुलाने लगा। वहां उसके साथ अशोभनीय हरकतें की गईं। विरोध करने पर नौकरी से निकालने और परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया।

सहयोगी पर भी पीड़िता को डराने का आरोप

मामले में यह भी सामने आया कि पीड़िता ने घटना की जानकारी आरोपी के चालक एस.आर.के. उर्फ शाहरुख को दी थी। आरोप है कि उसने पीड़िता की मदद करने के बजाय मुख्य आरोपी का साथ दिया और उसकी बात मानने के लिए दबाव बनाया। साथ ही नौकरी से हटाने की धमकी भी दी।

अदालत ने दोनों आरोपियों को ठहराया दोषी

पुलिस जांच पूरी होने के बाद मामला फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो) में चला। सुनवाई के बाद अदालत ने तत्कालीन फूड इंस्पेक्टर को पॉक्सो अधिनियम और संबंधित आपराधिक धाराओं के तहत दोषी मानते हुए अधिकतम पांच वर्ष के सश्रम कारावास तथा 24 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं सह-अभियुक्त शाहरुख को भी पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत पांच वर्ष के सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया गया। फैसला सुनाए जाने के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया।

कलेक्टर को जांच कराने के निर्देश

न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि नाबालिग को कथित रूप से अवैध तरीके से नौकरी पर रखने और राशन कार्ड से जुड़े कार्यों में धन उगाही अथवा अन्य अनियमितताओं के आरोपों की जांच कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी के स्तर पर कराई जाए।

विशेष लोक अभियोजक ने रखी शासन की ओर से पैरवी

मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक राजेंद्र कुमार गुप्ता ने पक्ष रखा, जबकि आरोपियों की ओर से अधिवक्ता राजीव दुबे ने पैरवी की। अदालत के फैसले के बाद मामले में आगे की प्रशासनिक जांच भी शुरू होने की संभावना है।

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