सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में कृषि विभाग और तहसील प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए किसानों को डीएपी खाद के नाम पर कथित रूप से जैव उर्वरक बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। सरसीवा थाना क्षेत्र के गाड़ापाली गांव में की गई कार्रवाई के बाद पुलकित बायोफर्टीलाइजर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है।
डीएपी बताकर बेचा जा रहा था दूसरा उत्पाद
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले दो से तीन वर्षों से सरसीवा क्षेत्र में सक्रिय थे। उन पर आरोप है कि वे सारंगढ़-बिलाईगढ़, जांजगीर-चांपा और शक्ति जिले के गांवों में जाकर अपने उत्पाद को डीएपी खाद बताकर किसानों को बेचते थे। किसानों को बाकायदा बिल भी दिया जाता था, जबकि कृषि विभाग के अनुसार बेचा जा रहा उत्पाद डीएपी नहीं बल्कि जैव उर्वरक था।
हरियाणा से होती थी सप्लाई, बार-बार बदलते थे ठिकाना
जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित उत्पाद हरियाणा के गुरुग्राम से मंगाया जाता था। आरोपियों के बारे में जानकारी मिली है कि वे ग्रामीण इलाकों में किराये के मकानों में रहते थे और पहचान छिपाने के लिए लगातार अपना ठिकाना बदलते रहते थे।
पिछले साल भी मिला था कंपनी का उत्पाद
कृषि विभाग के अनुसार वर्ष 2025 में भी सरसीवा तहसील के भिनौदा गांव में इसी कंपनी का उत्पाद मिला था। हालांकि उस समय संबंधित विक्रेताओं तक कार्रवाई नहीं पहुंच पाई थी। इस बार संयुक्त अभियान के दौरान चार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सरसीवा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
किसानों से की गई महत्वपूर्ण अपील
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खाद और उर्वरक केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही खरीदें। खरीदारी के समय पक्का बिल जरूर लें और यदि कोई व्यक्ति गांव में डीएपी खाद के नाम पर संदिग्ध उत्पाद बेचता मिले, तो इसकी सूचना तुरंत कृषि विभाग या नजदीकी पुलिस थाने को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।



















