धमतरी में चिटफंड घोटाले की परतें खुलीं, 8 साल बाद भी निवेशकों की उम्मीद कायम

 धमतरी :  फर्जी चिटफंड कंपनियों की ठगी का असर आज भी लोगों के जीवन पर भारी पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार करीब 1 लाख 59 हजार 248 निवेशक इन कंपनियों के जाल में फंसकर अपनी मेहनत की कमाई गंवा चुके हैं। लगभग 335 चिटफंड कंपनियों पर कुल 4 अरब 35 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप दर्ज है। यह मामला जिले की सबसे बड़ी आर्थिक ठगी में से एक माना जा रहा है।

सपनों का सौदा, जो बन गया सबसे बड़ा धोखा
इन कंपनियों ने लोगों को कम समय में पैसा दोगुना करने और ऊंचे रिटर्न का लालच देकर निवेश के लिए प्रेरित किया था। शुरुआती दौर में भरोसा जीतने के बाद जैसे ही स्कीम की अवधि पूरी हुई, कई कंपनियां अचानक अपने दफ्तर बंद कर फरार हो गईं। जब निवेशकों ने अपनी जमा पूंजी वापस मांगनी शुरू की, तब उन्हें ठगी का असली सच समझ में आया।

आठ साल का लंबा इंतजार, लेकिन राहत अब भी दूर
इस पूरे मामले को 8 साल से अधिक समय बीत चुका है। निवेशकों ने दस्तावेजों के साथ आवेदन भी जमा किए, लेकिन कई प्रकरण अभी भी ट्रिब्यूनल कोर्ट में लंबित हैं। लोग लगातार तहसील, एसडीएम, कलेक्टर, पुलिस प्रशासन और यहां तक कि मुख्यमंत्री कार्यालय तक अपनी फरियाद लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें पूरी राहत नहीं मिल सकी है।

पुलिस कार्रवाई तो हुई, लेकिन पैसा अब भी वापस नहीं आया
धमतरी पुलिस ने इस मामले में 40 से अधिक चिटफंड कंपनियों के डायरेक्टर, मैनेजर और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा गया। इसके बावजूद निवेशकों की पूरी राशि वापस लौटाने की प्रक्रिया कानूनी उलझनों में फंसी हुई है। प्रशासन के अनुसार अब तक केवल 3 कंपनियों से संबंधित राशि की ही वापसी संभव हो पाई है।

सरकारी प्रयास जारी, लेकिन नतीजे सीमित
तत्कालीन सरकार ने निवेशकों की राशि वापसी के लिए विशेष अभियान चलाया था, जिसमें कंपनियों की संपत्तियों की पहचान कर कुर्की और नीलामी की कार्रवाई भी शामिल थी। वहीं वर्तमान सरकार भी मामलों की समीक्षा, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और कानूनी प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दे रही है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पीड़ितों को अभी तक न्याय का इंतजार है।

आज भी वही सवाल, आखिर कब लौटेगी मेहनत की कमाई
छत्तीसगढ़ में चिटफंड घोटाला हजारों करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है और लाखों लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। धमतरी के हजारों परिवार आज भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी जिंदगी भर की जमा पूंजी कभी न कभी वापस मिलेगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि 8 साल बाद भी आखिर यह इंतजार कब खत्म होगा।

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