हाईकोर्ट का अहम फैसला: रिटायरमेंट के करीब कर्मचारियों को ट्रांसफर सुरक्षा का सीमित लाभ

बिलासपुर। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि ट्रांसफर पॉलिसी के तहत रिटायरमेंट के करीब कर्मचारियों को मिलने वाली सुरक्षा तब लागू नहीं होगी, जब सेवा अवधि में एक वर्ष से अधिक समय शेष हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि ट्रांसफर और पदस्थापना प्रशासनिक सेवा का हिस्सा हैं और इन पर अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकता, जब तक कि वे दुर्भावना या कानून के उल्लंघन से प्रभावित न हों।

मामला क्या था: वन विभाग के अधिकारी की याचिका

यह मामला उत्तम प्रसाद पैकरा से जुड़ा है, जो जनकपुर में वन उप मंडल अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। उनकी सेवानिवृत्ति वर्ष 2026 में निर्धारित थी। जून 2025 में उनका तबादला जिला संघ में उप प्रबंध निदेशक के पद पर कर दिया गया।

याचिकाकर्ता का आरोप था कि यह स्थानांतरण एक अन्य अधिकारी को उसके गृह जिले में पदस्थ करने के उद्देश्य से किया गया था, जो नियमों के खिलाफ था। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह निर्णय सामान्य पुस्तक परिपत्र का उल्लंघन करता है, जिसमें गृह जिले में पोस्टिंग पर रोक का प्रावधान है।

प्रशासनिक प्रक्रिया और पहले के निर्णय

मामले के दौरान हाईकोर्ट के निर्देश पर याचिकाकर्ता ने वरिष्ठ सचिवों की समिति के समक्ष अपना पक्ष रखा। इसके बाद विभाग ने दोनों ट्रांसफर आदेश रद्द कर दिए और दोनों अधिकारियों को उनकी मूल पोस्टिंग पर वापस भेज दिया।

हालांकि, दूसरे अधिकारी ने इस आदेश को सिंगल बेंच में चुनौती दी, जहां राज्य शासन का निर्णय निरस्त कर दिया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने इस आदेश के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील दायर की।

याचिकाकर्ता के तर्क

अदालत में याचिकाकर्ता ने बताया कि वह 4 जुलाई 2025 से 3 अगस्त 2025 तक चिकित्सकीय अवकाश पर थे और 4 अगस्त 2025 को पुनः ड्यूटी पर लौटे। उनका यह भी कहना था कि संबंधित अधिकारी उसी जिले का निवासी था और उसका गृह जिले में पदस्थ होना नियमों का उल्लंघन है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी और निर्णय

सभी पक्षों को सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने कहा कि ट्रांसफर आदेश जारी होने के समय याचिकाकर्ता की सेवा अवधि लगभग एक वर्ष चार माह शेष थी। ऐसे में ट्रांसफर पॉलिसी का वह प्रावधान, जो रिटायरमेंट के निकट कर्मचारियों को संरक्षण देता है, इस मामले में लागू नहीं होता।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक यह साबित न हो कि ट्रांसफर आदेश किसी दुर्भावना या कानूनी त्रुटि से प्रभावित है, तब तक कोई भी कर्मचारी किसी विशेष स्थान पर बने रहने का अधिकार नहीं मांग सकता।

अंतिम निर्णय

इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को यथावत रखते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

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