जशपुर : पुलिस विभाग के भीतर अनुशासन को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने कर्तव्य के प्रति लापरवाही और अनुशासनहीनता पर कड़ा रुख अपनाते हुए पांच आरक्षकों पर कार्रवाई की है। इनमें तीन आरक्षकों को सेवा से पूरी तरह पृथक कर दिया गया है, जबकि दो पर विभागीय नियमों के तहत कठोर दंड लगाया गया है।
लगातार गैरहाजिरी बनी बर्खास्तगी की मुख्य वजह
विभागीय जांच में यह स्पष्ट हुआ कि तीन आरक्षकों का आचरण लंबे समय से गंभीर रूप से अनुशासनहीन रहा। बिना किसी सूचना के लंबे समय तक अनुपस्थित रहना, पूर्व में दंडित होने के बावजूद सुधार न करना और कर्तव्य के प्रति उदासीन रवैया उनकी बर्खास्तगी का आधार बना।
संतोष कुमार राम 13 वर्षों की सेवा में 33 बार अनुपस्थित रहते हुए कुल 469 दिन गैरहाजिर रहे। नेल्सन तिग्गा ने 17 वर्षों में 28 बार अनुपस्थिति दर्ज कराते हुए 923 दिन ड्यूटी से दूरी बनाई। वहीं अशोक कुमार एक्का 20 वर्षों की सेवा में 30 बार अनुपस्थित रहकर कुल 1151 दिन तक बिना अनुमति गायब रहे। लगातार चेतावनियों और दंड के बावजूद इनके व्यवहार में कोई सुधार नहीं हुआ।
तीन आरक्षकों की सेवा समाप्त, दो पर वित्तीय और सेवा संबंधी दंड
पुलिस रेगुलेशन 221(अ) के तहत की गई कार्रवाई में तीन आरक्षकों को सेवा से पृथक किया गया है। इसके अलावा इरीमियस कुजूर पर एक वेतन वृद्धि के बराबर राशि की स्थायी कटौती का दंड लगाया गया है। वहीं बिंदेश्वर राम को एक वर्ष तक न्यूनतम वेतनमान पर रखने का निर्णय लिया गया है, जिसका असर उनकी भविष्य की वेतन वृद्धि और पेंशन पर भी पड़ेगा।
पुलिस नेतृत्व का सख्त रुख: अनुशासन से कोई समझौता नहीं
एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने स्पष्ट किया कि पुलिस विभाग में अनुशासनहीनता, लापरवाही और स्वेच्छाचारिता किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि विभागीय कार्यप्रणाली की विश्वसनीयता और पुलिस की छवि बनाए रखने के लिए जवाबदेही और अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है। आगे भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।



















