रायपुर। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा नक्सलवाद खत्म होने के बाद सुरक्षा बलों की वापसी को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी। अरुण साव ने कहा कि भूपेश बघेल कभी नहीं चाहते थे कि छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो। उनका प्रदेश के विकास और खुशहाली से कोई लेना-देना नहीं है।
सुरक्षा बलों और नक्सल प्रभावितों के पुनर्वास पर स्पष्ट शब्द
अरुण साव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भूपेश बघेल की सरकार में पुलिस और सुरक्षा बलों के हाथ बांध दिए गए थे, जिस वजह से नक्सलियों ने खुशी मनाई थी। आज भी उनकी मंशा बार-बार स्पष्ट हो रही है।
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 16,000 नक्सल प्रभावितों के पुनर्वास और सरकारी सुविधाओं की पहुंच के लिए पूरी तैयारी के साथ अभियान चलाया। नक्सली जब सरेंडर करेंगे, उन्हें अच्छा पुनर्वास मिलेगा। यही रणनीति इस संकट पर प्रभावी साबित हुई और कम समय में नक्सलवाद समाप्त हो गया।
पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था पर तीखा कटाक्ष
अरुण साव ने पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया से जुड़े न्यायिक अधिकारी को बंधक बनाए जाने और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर कहा कि पश्चिम बंगाल में कानून का राज नहीं है। उनका कहना था कि ममता बनर्जी की सरकार संविधान से नहीं चल रही, बल्कि तानाशाही कर रही है। उन्होंने जोड़ा कि पश्चिम बंगाल की जनता इस तानाशाही से परेशान है और आने वाले चुनाव में ऐसी सरकार को हटाया जाएगा।
वैट में छूट खत्म होने और पेट्रोल के दाम पर प्रतिक्रिया
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि वैट में छूट खत्म होने और पेट्रोल की बढ़ी कीमतों के बावजूद आम जनता सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार और जनता मिलकर इस चुनौती का सामना करेगी। वैश्विक स्थिति में सुधार होने से घरेलू हालात भी बेहतर होंगे।
नक्सली सरेंडर को लेकर मनीष कुंजाम के आरोप खारिज
पूर्व विधायक और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े मनीष कुंजाम द्वारा नक्सली कमांडर के बड़ी डील होने पर सरेंडर करने के आरोप पर अरुण साव ने कहा कि यह आरोप बेबुनियाद और निराधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नक्सली स्वेच्छा से सरेंडर कर रहे हैं और यह छत्तीसगढ़ सरकार की सरेंडर पॉलिसी का ही प्रतिफल है।



















