बिहार की सियासत में नीतीश एकमात्र ऐसे नेता हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि वे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को साधने में माहिर हैं, नीतीश भाजपा से होने के बाद भी मुस्लिमानों की पसंद वाले नेता हैं. लेकिन अब जब नीतीश ने दिल्ली का टिकट ले लिया तो बिहार की राजनीति में एक बार फिर से खलबली मची हुई है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरूवार को राज्यसभा के लिए नामांकन कर दिया. इसके बाद से ही बिहार की राजनीति 360 डिग्री पर घूम गई है. दो दशक से बिहार की सत्ता नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द घूम रही थी. उनके राज्यसभा जाने के बाद अब पहली बार बिहार की भाजपा मुख्यमंत्री बनने वाला है.
किस नेता को भाजपा सौंपेगी बिहार की कमान
ऐसे में सवाल उठता है कि बीजेपी किस नेता को बिहार की सत्ता की कमान सौंपेगी यानि किसे मुख्यमंत्री बनाएगी. नीतीश कुमार के इस फैसले से उनकी चारो सदन में सदस्य बनने की ख्वाहिश तो पूरी हो गई लेकिन इसी के साथ बिहार में सत्ता परिवर्तन की इबारत भी लिखी जा चुकी है. अब भाजपा को राज्य में सीएम फेस की तलाश है तो वहीं जेडीयू को उपमुख्यमंत्री का चेहरा खोजना है.
सीएम पद के लिए भाजपा से कई दिग्गज नेता रेस में हैं तो वहीं जेडीयू से भी कई चेहरे डिप्टी सीएम के लिए दौड़ में हैं. ऐसे ये देखना दिलचस्प हो जाएगा कि भाजपा अब किसे कमान सौंपेगी.
भाजपा का कैसा रहा बिहार में फॉर्मूला
गौरतलब है कि बीजेपी 2005 से 2013 तक सिर्फ एक डिप्टीसीएम बनाती रही तो 2017 के बाद से मुख्यमंत्री की कुर्सी नीतीश के देने के बदले में दो डिप्टीसीएम अपना बनाती रही. लेकिन अब बीजेपी जब अपना सीएम बना रही है तो जेडीयू को डिप्टीसीएम का पद एक मिलेगा या फिर दो, ये बात फिलहाल सामने नहीं आई है. ऐसे में देखना होगा कि बिहार में सत्ता और सरकार का क्या फार्मूला बनता है?
सीएम के रेस में कौन-कौन शामिल?
सीएम पद की रेस में फिलहाल उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है. वे पीएम मोदी और अमित शाह के बेहद भरोसेमंद माने जाते है. इस रेस में दूसरा नाम नित्यानंद राय का हैं. ये भाजपा के केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हैं. इन्हें भी अमित शाह का बेहद खास माना जाता है. ये 2019 से केंद्र में मंत्री और अमितशाह के साथ गृह मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे हैं.



















