NEW DELHI: भारत में आवारा कुत्तों की अनुमानित 6 करोड़ की आबादी एक राष्ट्रीय संकट बन चुकी है, जो छत्तीसगढ़ और बिहार जैसे राज्यों में जन-स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती पेश कर रही है। 2024 में देशभर में 37 लाख से अधिक कुत्तों के काटने के मामले दर्ज हुए, और रेबीज से होने वाली वैश्विक मौतों का 36-37% हिस्सा भारत का है। छत्तीसगढ़ के रायपुर में प्रतिदिन 47-57 और बिहार के पटना में 200 से अधिक लोग कुत्तों के काटने का शिकार बन रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त 2025 को दिल्ली-एनसीआर में सभी आवारा कुत्तों को 8 सप्ताह के भीतर शेल्टर होम में स्थानांतरित करने का सख्त आदेश दिया है, जिसने इस समस्या पर राष्ट्रीय बहस को और तेज कर दिया है।
आवारा कुत्तों की स्थिति:
Statistics at the national level
2019 की पशुधन जनगणना के अनुसार, भारत में 1.53 करोड़ आवारा कुत्ते थे, लेकिन 2023-2025 की अनाधिकारिक रिपोर्ट्स के आधार पर यह संख्या अब 6 से 6.2 करोड़ तक पहुंच चुकी है।
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, ओडिशा, और राजस्थान में सबसे अधिक आवारा कुत्ते हैं। दिल्ली-एनसीआर में 8-10 लाख और मुंबई में 90,700 से अधिक कुत्ते हैं।
2024 में 37 लाख कुत्तों के काटने के मामले दर्ज हुए, और रेबीज से हर साल लगभग 20,000 मौतें होती हैं, जो वैश्विक रेबीज मृत्यु का 36-37% है।
Situation in Chhattisgarh
छत्तीसगढ़ में अनुमानित 2.63 लाख आवारा कुत्ते हैं, जिनमें रायपुर जिला सबसे अधिक प्रभावित है। रायपुर में पिछले तीन वर्षों में 51,730 कुत्तों के काटने के मामले दर्ज हुए, यानी प्रतिदिन 47-57 लोग प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय प्रशासन नसबंदी और टीकाकरण अभियान चला रहा है, लेकिन अपर्याप्त संसाधनों और जागरूकता की कमी के कारण समस्या बनी हुई है।
बिहार में आवारा कुत्तों की समस्या गंभीर है, जहाँ रोजाना 500-568 लोग कुत्तों के काटने का शिकार बनते हैं। पटना में 1.8 लाख से अधिक आवारा कुत्ते हैं, और हर साल 45,000-50,000 लोग कुत्तों द्वारा काटे जाते हैं। प्रतिदिन 200 से अधिक लोग अस्पतालों में उपचार के लिए पहुंचते हैं। बिहार में रेबीज के मामले भी चिंताजनक हैं, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) की उपलब्धता सीमित है।
Strict intervention of the Supreme Court
11 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में सभी आवारा कुत्तों को 8 सप्ताह के भीतर शेल्टर होम में स्थानांतरित करने का आदेश दिया। मुख निर्देश शामिल हैं: प्रत्येक शेल्टर में 5,000 कुत्तों की क्षमता, नसबंदी और टीकाकरण सुविधाएँ, और सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था।
कुत्तों के काटने और रेबीज की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन स्थापित करना।
कोर्ट ने कहा, “शिशुओं और बच्चों को रेबीज का शिकार नहीं बनने दे सकते।”
यह आदेश 2023 के पशु जन्म नियंत्रण नियमों (ABC Rules) से टकराता है, जो कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उनकी मूल जगह पर छोड़ने की वकालत करते हैं। पशु कल्याण संगठनों ने इसे अव्यवहारिक बताया है, क्योंकि दिल्ली में शेल्टर क्षमता केवल 1% है। यदि ABC नियम लागू रहते हैं, तो नगर निगम अधिकारी शेल्टर में कुत्तों को रखने पर मुकदमे का सामना कर सकते हैं, और यदि कोर्ट के आदेश का पालन करते हैं, तो नियमों का उल्लंघन होगा।
Central government initiative
भारत ने 2030 तक रेबीज मुक्त होने का WHO लक्ष्य अपनाया है। केंद्र ने ABC कार्यक्रम के लिए फंडिंग बढ़ाई है। भारत में आवारा कुत्तों की 6 करोड़ की आबादी, विशेष रूप से छत्तीसगढ़ और बिहार जैसे राज्यों में, एक गंभीर राष्ट्रीय संकट है। रायपुर में प्रतिदिन 47-57 और पटना में 200 से अधिक कुत्तों के काटने के मामले इस समस्या की भयावहता को दर्शाते हैं। सुप्रीम कोर्ट का दिल्ली में शेल्टर बनाने का आदेश एक सकारात्मक कदम है।