युद्ध का असर: प्लास्टिक उद्योग पर गहराता संकट, उत्पादन घटा, दाम बढ़ने तय

रायपुर : से सामने आ रही स्थिति यह संकेत दे रही है कि खाड़ी क्षेत्र में चल रहे युद्ध का असर अब स्थानीय उद्योगों तक पहुंच चुका है। पेट्रो केमिकल्स की आपूर्ति में आई कमी ने प्लास्टिक उद्योग की रफ्तार धीमी कर दी है, जिसका सीधा प्रभाव बाजार और उत्पादन दोनों पर दिखाई दे रहा है।

कच्चे माल की कमी से उद्योग पर दबाव
प्लास्टिक उत्पादों के निर्माण में उपयोग होने वाले पेट्रो केमिकल्स की सप्लाई घटने से उद्योगों को कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते लागत में बढ़ोतरी हो रही है और उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है। स्थिति यह बन गई है कि कई फैक्ट्रियों में चौबीस घंटे चलने वाला काम अब सीमित पालियों में सिमट गया है, जबकि छोटे इकाइयों में केवल एक पाली में ही काम चल रहा है।

उत्पादन में भारी गिरावट, कीमतों में उछाल
रायपुर और बिलासपुर के उद्योग जगत से जुड़े जानकारों के अनुसार प्लास्टिक सेक्टर में करीब पचास प्रतिशत तक उत्पादन कम हो चुका है। कच्चे माल की कीमतों में दस से पंद्रह प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यदि हालात लंबे समय तक बने रहते हैं, तो बाजार में प्लास्टिक उत्पादों और पैकेजिंग सामग्री के दाम और तेजी से बढ़ सकते हैं।

मजदूरों के सामने रोजी का संकट
उत्पादन घटने का असर सीधे तौर पर श्रमिकों पर भी पड़ रहा है। काम कम होने से मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा होने लगा है। खासकर अन्य राज्यों से आए श्रमिकों के लिए स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है। हालांकि फिलहाल उद्योगपति अपने स्तर पर स्थिति संभालने की कोशिश कर रहे हैं ताकि कुशल कामगारों को बनाए रखा जा सके।

सरकारी योजनाओं पर पड़ सकता है असर
प्लास्टिक उद्योग में आई सुस्ती का असर कई महत्वपूर्ण सरकारी परियोजनाओं पर भी पड़ने की आशंका है। जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं में बड़े पैमाने पर प्लास्टिक पाइप का उपयोग किया जाता है। छत्तीसगढ़ में इस योजना का अधिकांश काम पूरा हो चुका है और जून 2026 तक इसे समाप्त करने का लक्ष्य है, लेकिन बढ़ती कीमतों और घटती सप्लाई के कारण ठेकेदारों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

निर्माण और सिंचाई परियोजनाएं भी प्रभावित
प्रदेश में चल रही आवास और सिंचाई योजनाएं भी इस संकट से अछूती नहीं रहेंगी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे घरों में प्लास्टिक पाइप और पानी की टंकियों का उपयोग अनिवार्य रूप से किया जाता है। ऐसे में कच्चे माल की कमी और बढ़ती लागत से निर्माण कार्य की गति प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है।

आने वाले दिनों को लेकर अनिश्चितता
उद्योग जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि अगले कुछ हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय स्थिति सामान्य नहीं होती है, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में उत्पादन, रोजगार और परियोजनाओं पर व्यापक असर पड़ने से इनकार नहीं किया जा सकता।

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