नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा के पूर्व सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी की उस जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा, जिसमें उन्होंने ‘रामसेतु’ को राष्ट्रीय स्मारक और राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की है।
मुख्य न्यायाधीश की अनुपस्थिति में न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए केंद्र को नोटिस जारी किया। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
क्या है मामला?
सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्होंने जनवरी 2023 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार केंद्र को प्रतिनिधित्व दिया था, जिसमें रामसेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग की गई थी। लेकिन केंद्र ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है।
उन्होंने दावा किया कि राम सेतु प्राचीन स्मारक घोषित किए जाने के लिए सभी मानदंडों को पूरा करता है क्योंकि यह ऐतिहासिक, पुरातात्विक और कलात्मक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण धरोहर है।
कानूनी आधार
स्वामी ने दलील दी है कि रामसेतु, प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्व स्थल अधिनियम 1958 की धारा 3 और 4 के तहत संरक्षित स्मारक की सभी शर्तें पूरी करता है। ऐसे में सरकार इसे राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने के लिए बाध्य है।

राम सेतु क्या है?
‘रामसेतु’ चूना पत्थर की शृंखला है, जो तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी तटवर्ती क्षेत्र में स्थित पम्बन द्वीप से श्रीलंका के उत्तर-पश्चिमी तटवर्ती मन्नार द्वीप तक फैली हुई है। इसे हिंदू धार्मिक परंपराओं में पौराणिक महत्व का माना जाता है, क्योंकि इसे भगवान राम की सेना द्वारा बनाया गया सेतु कहा जाता है।
याचिका का तर्क
स्वामी का कहना है कि केंद्र सरकार ने अभी तक इस पर ठोस कदम नहीं उठाया है जबकि यह धरोहर भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक है।
उन्होंने अदालत से आग्रह किया है कि सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह उनकी अर्जी पर शीघ्र निर्णय ले और राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करे।