रायपुर: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah के बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। उन्होंने सदन में दावा किया कि नक्सल विरोधी अभियान में कांग्रेस का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इसी बयान के बाद प्रदेश में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
सोशल मीडिया पर खुली चुनौती
पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाते हुए अमित शाह को खुली बहस की चुनौती दी। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि उनकी सरकार के दौरान नक्सल समस्या से निपटने के लिए केंद्र को पूरा सहयोग दिया गया था।
बघेल ने यह भी आरोप लगाया कि संसद में दिया गया बयान तथ्यों से परे है। इसके बाद उन्होंने एक अखबार की कतरन साझा करते हुए लिखा कि क्या अब भी और सबूत चाहिए।
रमन सिंह का पलटवार
पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष Raman Singh ने बघेल के आरोपों पर तीखा जवाब दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि झीरम घाटी नक्सल हमले के सबूत होने का दावा करने वाले अब केवल अखबार की कतरन दिखा रहे हैं।
रमन सिंह ने आगे लिखा कि दूसरों पर आरोप लगाने से अपनी जिम्मेदारियां नहीं छिपाई जा सकतीं। उन्होंने बघेल के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि पांच वर्षों में केवल दोषारोपण की राजनीति ही देखने को मिली।
नक्सल मुद्दे पर बढ़ी राजनीतिक तल्खी
नक्सलवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी ने माहौल को और गरमा दिया है। एक ओर केंद्र और राज्य की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल इसे अपने-अपने नजरिए से पेश कर रहे हैं।



















