पहलगाम आतंकी हमले के खिलाफ दुनियाभर में भारतीयों का प्रदर्शन, लंदन से टोरंटो तक उठी पाकिस्तान के खिलाफ आवाज

लंदन। पहलगाम आतंकी हमले के खिलाफ दुनियाभर में भारतीय समुदाय आक्रोशित है। लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर भारत और पाकिस्तान समर्थकों के बीच जोरदार प्रदर्शन हुआ। शुक्रवार को भारतीय प्रवासियों ने पाकिस्तान दूतावास के बाहर प्रदर्शन कर पहलगाम हमले की निंदा की थी। इसके जवाब में पाकिस्तानी समर्थक भारतीय उच्चायोग के बाहर जुटे, जिसके बाद भारतीय समुदाय के लोग भी वहां पहुंच गए और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया।

एक भारतीय प्रवासी ने कहा, “पाकिस्तानी समर्थकों ने भारतीय उच्चायोग के बाहर विरोध किया। हम एकजुट होकर शांतिपूर्वक उनका जवाब देने पहुंचे।” एक अन्य प्रवासी ने कहा, “हमें उम्मीद है कि भारत सरकार पाकिस्तान को उसकी भाषा में जवाब देगी।”

दुनियाभर में भारतीयों का विरोध

फ्रांस:
फ्रांस के एफिल टावर के पास ‘प्लेस डू ट्रोकाडेरो’ में भारतीय समुदाय ने आतंकवाद के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां और तिरंगा थामे लोगों ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने फ्रांस, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र से पाकिस्तान जैसे देशों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का आग्रह किया।

फ्रैंकफर्ट:
रविवार को फ्रैंकफर्ट में 300 से अधिक भारतीय प्रवासियों ने सेंट्रल रेलवे स्टेशन से डोम रोमर तक विरोध मार्च निकाला। इस मार्च के जरिए आतंकवाद के शिकार परिवारों के प्रति एकजुटता जताई गई। साथ ही, बर्लिन स्थित श्री गणेश हिंदू मंदिर में पहलगाम हमले के पीड़ितों की स्मृति में ‘शांति होम’ का आयोजन किया गया।

टोरंटो:
कनाडा के टोरंटो में भी जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ। हिंदू फोरम कनाडा और अन्य संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रम में 500 से अधिक लोग शामिल हुए। कैंडल मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने “पाकिस्तान मुर्दाबाद” के नारे लगाए और कनाडा सरकार से पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित करने की मांग की।

ह्यूस्टन:
ह्यूस्टन में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सैकड़ों लोग एकत्र हुए और पहलगाम हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। प्रदर्शन के दौरान हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था, “आतंक का कोई धर्म नहीं होता, मासूमों की हत्या बंद करो।”

न्यूयॉर्क:
क्वींस, न्यूयॉर्क में दाऊदी बोहरा समुदाय ने भी हमले के शिकार लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की और आतंकवाद की निंदा करते हुए शांति का संदेश दिया।

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